जैसी करनी वैसी भरनी

आज जब मैं मायके पहुंची तो घर पर भाभी और उसकी बहु में किसी बात को लेकर विवाद चल रहा था|उनके किसी भी मामले में मुझे बोलने की इज़ाज़त नहीं थी,ये हुक्म मेरी अपनी भाभी ने मुझे उनके बेटे की शादी के तुरंत बाद दे दिया गया था..पर जो बात कानों में पड़ी तो मैं भी सन्न रह गई |
‘’पर रुपाली! इस कमरे से मेरी साडी उम्र की यादे जुडी हैं बेटा..तुम्हारे ससुर जी की हर याद,इसी कमरे से है…रुपाली मुझे उस छोटे कमरे में मत शिफ्ट करो…मुझे इनकी यादों से दूर मत करो..नहीं तो मैं मर जाऊँगी’’|
जेठानी अपनी बहु के आगे गिडगिडा रही थी पर बहु थी की टस से मास नहीं हो रही थी वो अपनी ही बात पर ही कायम रही ‘’मम्मी जी! आप बात को समझती क्यों नहीं है…बेबी के साथ अब जापा(बच्चे पालने वाली आया )भी होती है,आखिर जापा कब तक बेबी को लेकर मेरे कमरे में सोएगी,आखिर हमारी भी कोई पर्सनल लाइफ है की नहीं’’|
आज सास-बहु की बातें सुन कर मन बहुत उदास हो गया |आज से ठीक सात साल पहले, ठीक इसी तरह भाभी ने मम्मी को उनके उस कमरे में से निकाला था जहाँ वो पापा जी की मौत के बाद से रहती आ रही थी |
उस वक़्त घर में नई बहु के स्वागत के लिए मम्मी से उनका वो कमरा छीन लिया गया और उन्हें एक स्टोर नुमा कमरा ठीक करवा कर रहने लायक बना कर उन्हें वहाँ रहने को भेज दिया गया था |
आज भैया गए एक साल भी नहीं हुआ और भाभी की बहु ने उन्हें…उनके कमरे से बेदखल कर दिया कि ‘मुझे अपने बच्चों का कमरा…मेरे कमरे के साथ चाहिए…आप दादी वाले रूम में शिफ्ट हो जाओ’|
मैं हक्की-बक्की कुदरते के इस बेजुबान इन्साफ को देखने के लिए मजबूर थी कि जहाँ कल मेरी माँ को भेजा गया….आज वहीँ..उसी कमरे में मेरी भाभी जाने को मजबूर थी|

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव: