चैट बॉक्स

रविवारीय कहानी का अंतिम भाग

13 हफ़्तों का ये सफ़र बहुत यादगार रहा

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शोर मचाने पर मुँह,हाथ पैर बाँध कर पलंग से बाँध दिया जाता था और मेरी ऐसी हालत में भी हर रात मेरा रेप होता रहा…मैं विरोध कर-कर के हार चुकी थी…रोज़ मिल रहे दर्द की वजह से मैंने अपने आप को गोविन्द की मर्ज़ी के हवाले कर दिया|
कम से कम शरीर पर हो रहे अत्याचार तो बंद हो गए थे पर आत्मा के ज़ख्म वैसे ही रहे जैसे पहले दिन थे,शरीर की भूख ने मेरा क्या हाल कर दिया दी…..
पर दी …आपके प्यार और आपकी केयर ने मुझे इतनी हिम्मत दी कि मैं अपना सच आपके सामने लाने की हिम्मत कर पाई हूँ |

इतनी देर में शल्लों आंटी चाय की ट्रे लेकर आ गई …स्वाति ने वन्दु की आँखों के आँसू पौंछे और चाय का कप उसकी ओर बढ़ा दिया |और वंदना ने चाय को पकड़ लिया |
अब वंदना एक दम चुप थी …इतनी चुप की उसकी ये खामोशी बहुत तूफान समेटे हुए थी….ऐसा स्वाति को महसूस हो रहा था |
चाय खत्म होते होते ऐसा लगा जैसे इस प्याले के साथ साथ वंदना भी खाली हो चुकी थी…उसके चहरे पर एक तूफ़ान तो था पर अब वो शांत था |
चाय खत्म करते ही …वंदना ने वो ही फीकी मुस्कान के साथ …स्वाति से कहा ”दीदी मेरी ट्रेन का वक़्त हो गया है अब मुझे जाना होगा ”

पर स्वाति ने उसे रोकते हुए कहा ”नहीं वंदना एक दिन तो मेरे पास रुक जाओ , मुझे तुम्हें बहुत प्यार करना है,बहुत लाड लड़ाने ….तुम्हें पता है ना मेरी कोई बेटी नहीं है…..मुझे तुम्हारे साथ वही बेटी वाली फीलिंग आती है ….मुझे तुम्हें जी भर कर देख तो लेने दो ….जी भर के प्यार तो कर लेने दो |

वंदना ने वो ही फीकी मुस्कान दी और अपनी छोटी सी बेग उठाई। स्वाति ने उसे बहुत रोका पर वो रुकने को तैयार ही नहीं हुई तो चलते चलते स्वाति ने उस से कहा ”अच्छा! प्लीज़ मुझे अपना फोन नंबर दो …..मैं तुमसे बात करती रहूँगी और मेसज पर भी तुम्हारे टच में रहूँगी तो तुम्हारे पास होने का अहसास बना रहेगा, दिल्ली से राजकोट का रस्ता बहुत लंबा है बच्चे ….प्लीज़ अपना नंबर दे दो”|

पर वंदना ने कोई जवाब नहीं दिया और स्वाति के गले लग कर एक बार फिर से बहुत रोई और कहा ”काश ! आज मैं आपकी गुड़िया बन कर आपसे वो ही दो चोटी करवाती रिब्बन बँधवा कर” और हाँ! अगर जिंदगी कभी भी किसी भी मोड़ पर आपको आपका अगर सच्चा प्यार मिल जाए तो खुद को रोकिएगा नहीं,फ़ौरन थाम लेना क्योंकि आपके बच्चे USA सेटल्ड हो चुके हैं और आज के वक़्त में भी औरत किसी भी उम्र की हो उसे अकेला देख हर कोई झपटा मारता ही है और दी यकीन मानिए आपके बच्चे इस बात का कभी बुरा नहीं मानेंगे बल्कि वो आपकी ओर से चिंतामुक्त हो जाएंगे|’’

दोनों की ही आँखें एक बार फिर से गीली हो गई ….वंदना स्वाति से विदा ले कर चल दी …उसने पीछे मूड कर एक बार भी नहीं देखा जबकि स्वाति की नज़रें … उसे ही देख रही थी कि शायद उसकी वन्दु एक बार पीछे मूड कर देखे तो वो उसे रोक लेगी, पर ऐसा हुआ नहीं और वंदना चली गई……..

वंदना ने जाने से पहले स्वाति को अपनी ट्रेन के बारे में कुछ नहीं बताया था | ना कोई मोबाइल नंबर, ना घर का पता, बस वो इतना ही जानती थी कि वो राजकोट (गुजरात) से संबंध रखती थी …इस के अलावा उसका ओर कुछ पता नहीं था |

दिन, फिर महीने और अब चार साल बीत चुके थे |दिल्ली से जाने के बाद से वंदना का एक भी मेसेज स्वाति को नहीं मिला |वो कहाँ से उड़ती हुई आई और कहाँ चली गयी स्वाति कुछ नहीं जानती |वो आज भी फेसबुक खोल कर सिर्फ इसी आस में बैठती है कि हो सकता है एक दिन कभी उसकी गुडिया को उसकी याद आ जाये और वो उसे चेट बॉक्स में ”हेल्लो दी !जय श्री कृष्ण….कैसी हो आप….घर पर सब मजे में ना…. लिखे और वो मुस्कुराते हुए उसकी चेट का जवाब दे ‘’राम राम गुड़िया ! मैं ठीक हूँ…तू बता’’|

समाप्त …

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

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