You may also like...

39 Responses

  1. अर्थ से टूटी भाषा सच मुच भाषा कहाँ रह जाती है… एक गहरे संवेदना को व्यक्त कर रही है यह कविता…गीली मिटटी की पीड़ा तब बढ़ जाती है जब कुछ सार्थक गढ़ा नहीं जाता…. अनु जी एक सार्थक और संवेदनशील कविता है यह…

  2. पोर पोर फटती देखूं मै
    केवल इतना सा उजियारा
    मेरी आँखों में रहने दो
    सूरज सुर्ख बताने वालो
    अंधियारे बीजा करते है
    गीली मिटटी सी पीडाएं
    मेरी जो सलती है……

    कितनी ही बखूबी से आपने इतने सुंदर भाव व्यक्त कर दिए…….बहुत सुंदर और उम्दा रचना

  3. सुन्दर…सुदृढ़ एवं गहरे अर्थ लिए रचना

  4. बहुत खूब अनु जी…
    आभार

  5. masoomshayer says:

    is bar adbhud likhaa hai bahut hee sajeev

  6. Sunil Kumar says:

    पोर पोर फटती देखूं मै
    केवल इतना सा उजियारा
    मेरी आँखों में रहने दो
    यह हुई ना बात इसके आगे कुछ नहीं .

  7. अच्छी कविता
    मनोभावों का चित्रण करते हुए।

  8. सदा says:

    पोर पोर फटती देखूं मै
    केवल इतना सा उजियारा
    मेरी आँखों में रहने दो
    यह हुई ना बात इसके आगे कुछ नहीं .

    भावमय करती शब्‍द रचना ।

  9. सफ़र नहीं होता हैं कोई
    अपना ही आकाश बुनूं मै
    भरने दो मुझको पंखो में
    मेरी दिशा बांधने वालों
    केवल इतनी सी ही
    मेरी तलाश है

    wahhhhh annu..bahut sahi kaha…

  10. पोर पोर फटती देखूं मै
    केवल इतना सा उजियारा
    मेरी आँखों में रहने दो
    सूरज सुर्ख बताने वालो ||

    भावमय ||

  11. सफ़र नहीं होता हैं कोई
    अपना ही आकाश बुनूं मै
    भरने दो मुझको पंखो में
    मेरी दिशा बांधने वालों
    केवल इतनी सी ही
    मेरी तलाश है ..
    प्रणाम ! आप कि उड़ान अनन्त हो .. सुंदर अभिव्यक्ति .
    सादर

  12. अपना ही आकाश बुनूं मै
    भरने दो मुझको पंखो में
    मेरी दिशा बांधने वालों
    केवल इतनी सी ही
    मेरी तलाश है ………
    yahi talash to ham sabki hai Anu ji.
    bahut sundar rachna.

  13. सफ़र नहीं होता हैं कोई
    अपना ही आकाश बुनूं मै

    aafareen!

  14. Rajiv says:

    “अर्थ नहीं होता है कोई
    अर्थ से टूटी भाषा का
    तार तार कर संकू मौन को
    केवल इतना शोर तो
    सुबह का सुनने दो”
    अनु ,बहुत सुदर और प्रवाहमयी रचना जो जो रचनाकार की चाहत की गति को स्वयं में समाये हुए है.उस दिनभी मैंने यही कहा था.

  15. अक्सर आपका ब्लॉग..और कृतियाँ सोंचने को मजबूर करती हैं !
    शुभकामनायें अनु !

  16. रचना के लिये कहूँ तो बहुत सुन्दर है। लेकिन याचना क्यों? इतनी सबल बनो कि राह मे आने वाली हर अडचन को साहस से भगा सको। बहुत बहुत शुभकामनायें।

  17. सुन्दर एवं गहरे अर्थ लिए सुंदर अभिव्यक्ति …

  18. Anju Ji,itani sundar rachana ke liye aapko bahut bahut badhai.

  19. बहुत सुन्दर

  20. रेखा says:

    गहरी भावप्रवण रचना

  21. बहुत ही बढ़िया लिखा है, अच्छा लगा पढ़ कर !

    Na Jaane Kyun Khaali Sa Dil Mujhe Lagta Hai,
    Yaadein Bhi Bewajah Ab Gujarti Nahi Isme..(sachin)

    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion – सम्पूर्ण प्रेम…(Complete Love)

  22. beautifully written.

  23. बहुत खूब,सुन्दर एवं गहरे अर्थ लिए सुंदर अभिव्यक्ति …
    आभार

  24. anu says:

    आप सभी का यहाँ आ कर …मेरा हौंसला बढ़ने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

  25. Ankur jain says:

    अनुजी बड़ी कोमल, प्यार भरी, सुन्दर रचना…

  26. veerubhai says:

    भरने दो मुझको पंखों में मेरी दिशा बाँधने वालो ….सुन्दर विचार उत्तेजक तीव्र संवेदन और अम्प्रेशन लिए चोट करती रचना अंतस पर gehre bahut गहरे .

  27. wah Anu ji…behtreen bhavBodh….. Karnal to aksar aana-jana rahta hai….maine apni zindgi ke behtreen kunware solah saal karnal me hi gujare hain….aapse mil kar achcha laga….

  28. भावों को शब्द दिए हैं .. कभी कभी टूटी भाषा बहुत कुछ कहना चाहती है … पर अर्थ नहीं मिलते हैं ..

  29. आपकी कवितायेँ बहुत खूबसूरत हैं… बेहद संवेदनशील रचना…

  30. बहुत सुंदर, क्या बात है।

  31. मनोभावों का सुंदर तरीके से अंकन किया है आपने ….आपका आभार

  32. Jyoti Mishra says:

    Simply beautiful !!

  33. बेचेनी भरी तलाश …???
    एहसास से भरपूर !
    शुभकामनायें !

  34. anju aapki post me jo samvednayen dikhti hai, wo adhbut hoti hai…
    khud ko talash karna bha gaya…!!

  35. ASHOK ARORA says:

    रात भर …
    सफ़र नहीं होता हैं कोई
    अपना ही आकाश बुनूं मै
    भरने दो मुझको पंखो में
    मेरी दिशा बांधने वालों
    केवल इतनी सी ही
    मेरी तलाश है ……… anju jo aap ne likha hai..ye us man ki abhivyakti…jo kanhi under tak tuta hua hai…nirmla kapila ji ne jo kaha h us par gaur karo..kamjor na..bano…..bahut sunder likhati ho….SAI Bless u….