मै क्या हू …..?

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6 Responses

  1. nice kavita.par kuch kavita choti bhi likhye

  2. viki says:

    ese or bese ke chakrviu me jisne jee liya
    us hi ne to sab kuchh kar liya
    jeewan ki is jang ko sahki jeet liya
    jisne socha koi kya kahega
    phikr kari jisne jamane ki
    usne hi to apne liye sab kuchh jiya
    jo jiya sab ke liye uska jeewan hi to jeewan hua vk

  3. Pintu says:

    I’m sorry I can’t tell you what
    I’m sure you’d rather hear,
    But there’s a burden in my heart
    I can no longer bear.

  4. जब जीवन मे उमंग होती हे तो ‘चंचलता’ आती हे , पर जब जीवन मे निराशा होती हे तो अस्थिरता आती हे , मन बेचैन रहता हे .
    हर सोच को एक सुरंग मे हो कर गुजरना होता हे , चाहे वो उमंग हो या फिर निराशा. अगर मन मे निराशा हे , तो बेचैनी हे , मन टिक नहीं पाता किसी एक विषय पर, ना ही किसी एक सोच पर ! अगर हम बुधी को स्थिर रख अभ्यास से मन को स्थिर करने की चेष्टा करें तो मन धीरेधीरे स्थिर होने लगता हे जी….बस धयान इतना रखे की अभ्यास करते हुए ,निराशा को बल पूर्वक आपने से अलग रखना होता हे जी !

    Aapne styata purvak apne man ko kavita mey udhael diya hey , bahut sundar likha hey aapne ; prabhu aapko va aapki kalam mey shakti dey !

  5. neera says:

    जो लीखा है सच ही लीखा है यार….
    सभी शब्द अपने से लेगे…शायद सभी ये सोचते हैं …
    तुमने सबके दिल की बात लिख दी यार,,,बहुत खूब…

    पर दुसरे ही पल सब …लोगों संग हस लेती हूँ…
    ………………………………………..
    सही कहती हो यार हसना ही चाहिए ..हसना जिन्दगी की जरूरत है..
    जिन्दगी जियो तो इस अंदाज़ में की तुम्हे देख के लगे जिन्दगी कितनी ख़ूबसूरत है…