मन…………

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3 Responses

  1. सकारातमक सोच लिए अच्छी रचना

  2. जो ना कभी डरी किसी से
    जिस के आगे हाथी ने भी मानी हार है …
    एहे मेरे मन तू
    मुझे ये बता
    क्यों तू अकेला सा है ……………….
    अनु जी सुंदर कृति आप की ..!!
    बड़ा अच्छा लगा आप से जुड़ के …
    I am surprised …aap ktiti ..anu …hain …main ..anpama ki sukrity hoon ..!!
    Iishwar hai ..kahin na kahin …!!
    SHUBHKAMNAYEN AAPKO.

  3. जो ना कभी डरी किसी से
    जिस के आगे हाथी ने भी मानी हार है …
    एहे मेरे मन तू….. सकारातमक सोच..बहुत अच्छी रचना