बदलते रिश्ते

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11 Responses

  1. main uske dil ko padhti ho
    uske sabdo ko leekhne se pahle samajhti hoon..:)

    bahut khub…itna samjha tabhi to itna pyara sa likha!!

  2. Sunil Kumar says:

    फिर भी वह क्यों नहीं मेरी तरह सोचता …..नए विषय को उकेरा है आपने ,बधाई शायद आपके व्लाग पर पहली बार आया हूँ |

  3. This comment has been removed by the author.

  4. आपका हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

  5. आपका ब्लॉग बहुत पसंद आया है! बहुत सच्ची बातें कहीं हैं!

  6. नमस्कार मित्र आईये बात करें कुछ बदलते रिश्तों की आज कीनई पुरानी हलचल पर इंतजार है आपके आने का
    सादर
    सुनीता शानू

  7. दिल को छु गईं यह पंक्तियाँ।

    सादर

  8. बदलते रिश्ते और उनकी यादें … अच्छी प्रस्तुति

  9. Rakesh Kumar says:

    आपकी यह प्रस्तुति बहुत ही अच्छी लगी.
    बहुत बहुत आभार सुनीता जी की हलचल का.

    मेरी प्रार्थना थी कि आप मेरे ब्लॉग पर आतीं
    अपनी टिपण्णी रुपी प्रसाद से मुझे हर्षित कर जातीं.

    पर लगता है मैं आपके प्रसाद के शायद मैं लायक नही.

  10. बड़ी सुन्दर रचना है…
    सादर…

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