क्षितिजा | अपनों का साथ

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अच्छा होता हम बच्चे ही रहते ..वो कागज़ कि कश्ती …वो बारिश का पानी …कितन अच्छा तो वो बच्चपन काखेलना …मस्ती भरे दिन थे ..मौजो की थी रातेना कुछ सोचना….न कोई चिंता …मस्त मौला...

अजन्मी बच्ची की पुकार ……… 7

अजन्मी बच्ची की पुकार ………

अजन्मी बच्ची की पुकार ………माये ..क्यों तू ही मेरी दुश्मन बनीक्यों तू खुद को ही मारने चली …किया तुने एक घर को रोशनएक बंश बेल को बढने दिया …फिर क्यों ????????तूने मानी सब की...

जीवन है ये एक कटी पतंग………….. 2

जीवन है ये एक कटी पतंग…………..

जीवन है येएक कटी पतंगयह मै मानती हूदिन को तो ढलना हैशाम होने परसब जानते हैफिर भी …सूरज सुबह होते ही आता हैडरता नहीं डूबने के डर से ,वो ऊबता नहीं ,अपनी ही दिनचर्या...

ये चुनावी माहौल …… 0

ये चुनावी माहौल ……

चुनावी दौरलो जी ,फिर आया मौसम ,चुनाव काफिर से मुद्दों कि मुहीम छिडी…फिर से शुरू हुई वोटो को मांगने की..भीखहर प्रत्त्याशी ने अपने पत्ते है खोलेफिर से झूठे वादों का दौर आया …कही तो...

मै क्या हू …..? 6

मै क्या हू …..?

मै क्या हू …..?मै क्या सोचती हू ?मै क्या चाहती हू ?खुद नहीं जानती ……..क्या पाना ,क्या खोनामेरे लिए सब एक सा है ..क्यूकि इस दिल से उम्मीद ….शब्द ही मिट चुका है|कभी सोचू………ऐसा...

दो हंसो का जोड़ा…… 3

दो हंसो का जोड़ा……

दो हंसो का जोड़ानिर्मल,पवित्र ,पाक साश्वेत, श्यामल स्वछ सा ..चला है इस पार से उस पार..अपने पशुत्व को जीत केदेने चला सबको प्यार का उपहार …….दो हंसो का जोड़ा ……..देखो फिर बदली दिशा अपनी...

होली है ………होली है ….. 2

होली है ………होली है …..

होली है ………होली है …….आयो खेले होली मिल केदिल से दिल तक है ये सफ़रइस बार …फागुन कुछ बहका बहका हैमन भी कुछ महका महका हैले रंगों के बोछार…उडे लाल लाल गुलाल..भरे प्यार की...

यादे ……………. 9

यादे …………….

यादो के सफ़ेद परिंदे ….नीले आकश से है उतरेसफ़ेद परिंदों कि चादर चारो है फैली …कितनी निर्मल ,कितनी पवित्र ,और मन को शांति प्रदान करने वाली ,मेरी इन यादो में है बच्चपन बसा ,यौवन...

दे अपना सच्चा साथ …….. 4

दे अपना सच्चा साथ ……..

मै जग में बहुत नाची ,कभी क्रोध ने नचाया ,तो कभी कामनायों ने अपना सर उठाया ,कभी वसनायो ने आके मुझे हिलाया ,तो कभी लालच ने ललचाया ………क्या हू मै …….हर पल ये ही...

.माँ का मंथन ….. …….. 2

.माँ का मंथन ….. ……..

एक माँ कि पीडा …जो ना तो अपने बच्चो से कुछ कहेसकती है ……और ना ही अपने बडो को ….बड़े जो सब कुछ जानते हुए भी कुछ समझना नहीं चाहते,और …….बच्चे कुछ समझते नहीं...