Category: कविता

नारी जो……….

नारी जो……….

नारी जो है ….हर नर के जीवन मेहर पथ पर साथ चलने वाली……….जब मैंने लिया जन्म ..थामा जिसका हाथ ..चलने कोजिसके स्पर्श ने दी मुझे ..दी ममता मुझेवोह थी मेरी माँ ……..जब मै हुआ...

जब भी खुद को आईने मे देखा…………..

जब भी खुद को आईने मे देखा…………..

जब भी खुद को आईने मे देखाउसे भी मुझ पे हँसते पाया …वक़्त के हाथो खुद को लुटा पाया ..मै तो अंधेरो मे खो जाती ….इस दुनिया की  भीड़ मे ..अगर ..वो मेरा हाथ...

जोकर……………

जोकर……………

तू बन कर तू बन कर जोकरदे ख़ुशी सबको ,दे मुस्कान हर चेहरे परतू बन कर गुलाब ,रह काँटों के बीच,अपनी सुन्दरता को बढाकर न किसी कोदुखी तू ,बोल ना कड़वे बोल तूमन ना...

मन…………

मन…………

एहे मेरे मन तूमुझे ये बताक्यों तू अकेला सा है ..क्यों तेरा ये चेहरा ..बुझा सा हैजीवन के पथ पर तूक्यों यु पड़ा अकेला सा है ..अपने राही को लेथाम उसका हाथ ..मुश्किलों का...

आंखे …..

आंखे …..

याद करके जबरोने लगी येआंखे ………..अश्क भी ..अब साथनहीं देते …दिल मे उठे दर्दको नहीं मै समझ पा रहीख़ुशी की तलाश मे..चली थी मै…….पर गमो को साथ लिये…लौटी हु मै …….ना भूलने वाली यादे...