Category: कविता

मेरे मालिक……..

मेरे मालिक……..

मन क्यों अशांत सा हैसंतुष्टि का भान क्यों नहीं हैजल रहा दीयाफिर पतंगा ही परेशान सा क्यों है भागा था वो अँधेरे से डर करपर क्या मिला रोशनी में आ कर उसे क्यों आँखे...

मोहब्बत…………..

मोहब्बत…………..

तेरे दामन से यू लिपटे है हम कि ख्याबो के मंज़र भी छोटे नज़र आने लगे हैं || दिल की दुनिया को यू सज़ा बैठे है हम तेरे संग कि भरी महफ़िल में भी...

नजदीकियां कैसे है ये दिलो के फांसले , जो नजदीकियां को बढाते हैं ;जिंदगी के इस मोड़ पर यह प्यार का नाता हमारा ,रहा कि वीरानियो को जैसे मिल गया हो सहारा तुम्हाराजिनता दूर...

मासूम सी अदा हर शाम चले जाते हो कल का वादा करके लेकिन तुम बिन कैसे रात गुजार पाएंगेजाने क्या कहते है वो इन दो निगाहों सेऐसा लगे जैसे मोहब्बत का पैगामसुना कर चले...

मै जी लूंगी…मै जी लूंगी …….

मै जी लूंगी…मै जी लूंगी …….

मै जी लूंगी…मै जी लूंगी ..…..अजीब है इस दिल की हसरते भीपास हो कर भी दूरियाँ हैं कितनीछुने का मन करता हैपर उसके खो जाने का भी डरसताता हैंबैठे है हम पास उनके इतनामन...

मेरी तन्हाई

मेरी तन्हाई

(आज मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट आप सबके साथ साँझा कर रही हूँ ….इसे मैंने २४ फरवरी २०१० में लिखा था ….शब्दों के बदलाव के बिना और बिना किसी एड्टिंग के आप सबके सामने...

अजीब सी उलझन में है ये मन

अजीब सी उलझन में है ये मन

अजीब सी उलझन में है ये मन अजीब सा ये एहसास हैउम्र के इस मौड़ परक्या किसी के आगमन का ये आभास हैक्यों अब ये दिल जोर जोर से धड़कता हैक्यों हर पल उसकी...

खामोशिया

खामोशिया

तेरी खामोशिया बहुत कुछ ब्यान करती हैबंदिशे तेरी ..मुझे तक पहुँचती हैदेके आवाज़ तुझे ..रोकने का मन करता हैपर क्या करूँ…तेरी भी कुछ मजबूरियामुझे हर बार रोकती है … बाँध दिए थे सब अरमां…दूर...

वजह हो तुम …….

वजह हो तुम …….

वजह हो तुम …….मन बेचैन है मेरा … याद् बन गये हो,क्यूंकि साथ नहीं हो तुम ………. हृदय में उतर जाते हो ,मेरी स्पंदन हो तुम …..मेरे होने की वजह , मीठा बंधन हो...

प्यार हमारा

प्यार हमारा

प्यार हमारा जिसका कोई रूप नहीं है जिसकी कोई भाषा ,कोई बोली नहीं है जो समझता है दिल कि ही बातो को एहसास है तो सिर्फ साथ बंध जाने का तमन्ना है तो अब...