संस्कार

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” सुनते हो , आज नयन भाई, सरिता भाभी और बच्चे रात तक आ जायेंगे और यहाँ अभी तक हमारी तरफ से कोई तैयारी नहीं हुई , उन्होंने हमारी कितनी मदद की है ” नीला ने अपने पति से कहा |
” अरे वो हमारे अपने ही है और घर पे ही तो आ रहे है इसमें तैयारी क्या करनी ? फिर भी तुम बताओ,कुछ लाना है, तो में बाज़ार से लेकर आता हूँ । ” नीला के पति राकेश बोले
” मैंने बच्चों और उनके लिए पिज़ा,ब्रेड,चीज़,हर वो समाना बनाने की पूरी तैयारी कर ली है जो बच्चे खाते हैं। उनको कब किस चीज को खाने की इच्छा हो, पता नहीं।
नयन भाई , राकेश जी के बड़े भाई थे। जो पढ़ने अमेरिका गए थे पर वहाँ जा ने के बाद बहुत कम लोग वापस आये है,ठीक वैसे ही राकेश जी भी नहीं आए। वहीँ साथ पढने वाली दूसरी कास्ट की लड़की के साथ शादी की। और अब उनके दो बेटे हैं|
राकेश को नयन ने बहुत बार अमेरिका बुलाया था पर वो कभी जाने का सोच भी नहीं पाते थे क्योकि राकेश की कमाई उतनी थी नहीं की वो इतना बड़ा टूर बना सके और नयन भाई के पैसे से उसे घूमना नहीं था , राकेश और नयन की माँ अभी जिन्दा थी पर वो नयन से बात नहीं करती थी क्योकि नयन का अमेरिका में रहना और दूसरी कास्ट की लड़की से शादी करना उन्हें पसंद नहीं था , वो कभी भी नयन के साथ फोन पे भी बात नहीं करती थी । नयन भाई अमरिका से सबके लिए गिफ्ट भेजते रहते थे, पर माँ ने उनके भेजे एक भी गिफ्ट को कभी स्वीकार नहीं किया था…आज तक उनके भेजे गिफ्ट ऐसे ही पड़े थे |
और इस तरह एक दिन उनका यूँ फोन आना कि वो एक महीने के लिए इंडिया आ रहे हैं और बच्चों की ये जिद्द है कि वो अपने परिवार के साथ ही रहना चाहते हैं,ये सब सुन कर माँ के साथ साथ राकेश को भी बहुत हैरानी हुई थी,पर नयन भाई के परिवार के आने से सबसे ज्यादा राकेश जी बिटियाँ खुश थी कि उनके दो भाई उनके साथ एक महीना रहने के लिए आ रहे हैं |
अमेरिका से आने वाले अपने जैसे ही आम इंसान ही होते है, अपने जैसे ही होते है पर भारत में रहने वाले उनके रिश्तेदार,उनके साथ ऐसे पेश आते है जैसे स्वर्ग से भगवान ही मिलने आ रहे हो |
पूरा दिन तैयारियों में बीत गया,आखिर रात हुई और पूरा घर एयरपोर्ट पहुँचा और सब को घर ले कर आ गए | नयन को पता था कि माँ उस से नाराज़ है, इसलिए वो सब से पहले बच्चे और पत्नी को ले के माँ के पास गया और सब ने माँ जी के पैर छुए |बच्चों की मासूमियत के आगे माँ पिघल माताजी गई और उन्होंने नयन को,उसकी पत्नी और बच्चों सहित अपना लिया | सब एक दूसरे के गले लग कर रोये |रात ज्यादा हो गई थी,लगभग सुबह होने को थी..फ्लाइट में खाए खाने के बाद भी…फिर से सबको भूख लग आई थी|सुबह की चाय के दौर के साथ बच्चों के लिए जो नीला ने पिज़ा और बाकि के स्नेक्स बनाये थे वो परोस दिए…पर अमरिका से आये दोनों बच्चों ने वो सब नहीं खाया |ये देख नीला और राकेश को अजीब लगा,पूछने पर उन्होंने हिंदी/इंग्लिश मिक्स भाषा में कहा कि ‘These things we eat everyday in USA …..हमको तो home maid food चाहिए….like आलू पोहा,चाट पापडी and वो मोठ कचौड़ी चाची जी ‘’
घर के सब लोगों को आश्चर्य हुआ,तभी नयन ने बताया कि बड़ा बेटा यहाँ आने से पहले वो गूगल में इंडिया और इंडियन खाने की चीजों के बारे में सर्च करता हुआ आया है|
नीला ने पिज़ा,ब्रेड उठा कर दुबारा फ्रिज में रख दिए और बच्चों को आलू पोहा बना कर दिया,जो सब ने बड़े चाव से खाया। रोज अलग अलग भाजी या अलग अलग चाट के नाम वो बताता और नीला बड़े चाव से बना के देती |
नीला की दोनों बेटियो के साथ नयन के दोनों बेटे बड़े घुल-मिल गए थे। ये देख के सबसे ज्यादा ख़ुशी माँ को हो रही थी। नयन और उनके फेमिली को आये पच्चीस दिन हो गए थे,अब सिर्फ पांच दिन बाकी थे |इस दौरान माँ बच्चों को रोज़ नई नई कहानियां सुनाती थी।
ऐसे ही दो दिन ओर बीत गए अब सिर्फ तीन दिन बाकी थे |माँ ने राकेश को अपने पास बुलाया और कहा ‘’सब को देने के लिए कुछ भेट ले के आओ,हम नयन को खाली हाथ तो नहीं भेज सकते।
राकेश ने कहा ” माँ! क्या हमारी दी हुई चीजें उनको पसंद आएगी ?
माँ..’’तोहफे उन्हें पसंद आये या ना आये पर देने ओ है ही ‘’
राकेश ..’’इससे अच्छा की सब को हाथ में केश दे दो माँ|’’
दोनों की बातें अभी चल रही थी,जिसे नयन सुन रहा था ये बात उनको नहीं पता थी |तभी नयन दरवाज़े की ओट से निकल कर सामने आ गया और बोला..’’माँ! मुझे तो आपसे कुछ लेना है नहीं…आपने बच्चों को कुछ देना ही है तो वो आप उन ही से पूछ के दे देना कि उन्हें अपने लिए क्या चाहिए|’’
और नयन ने आवाज़ देकर सब को माताजी के कमरे में बुलाया सब लोग माताजी के कमरे में इकठ्ठे हो गए , नीला और राकेश डर रहे थे की बच्चे कोई बड़ी चीज ना मांग ले जो वो ला के दे ना सके |
नयन ने बच्चों से पूछा ” चाचा आपके लिए कुछ गिफ्ट लेने जा रहे है , बताओ आपको क्या चाहिए ?
बच्चों ने कहा ” हम जो मांगेंगे क्या आप दोनों हमें वो दोगें ?
माँ ने कहा ‘’अरे बच्चों माँग के तो देखो ‘’|
दोनों बच्चें माँ के पास आ गए और बोले ” दादी हमारे पास अमेरिका में सब कुछ हैं, बस वहाँ हमारे पास दादी नहीं है | तो क्या आप हमारे साथ चलोगी ?
उनकी बात सुन कर सबकी आँखों में आँसूं आ गए और माँ ने आगे बढ़ कर सभी बच्चों को अपने गले लगा लिया,ये सोचते हुए कि माँ/बाप देश में हो या विदेश में ..अच्छे संस्कार देना आज भी माँ-बाप के हाथ में है |

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव: