Author: Anju Choudhary

बचपन 3

बचपन

बचपन के वो दिन जो बहुत अच्छे थे ..जिसकी याद में हर व्यक्ति खुद को जीने लगता है कुछ यादे कभी भुलाये नहीं भूलती ॥बस उन्ही यादो को लिखने की चेष्टा की है कोई...

अंतिम ..सफ़र 2

अंतिम ..सफ़र

मन क्यों अशांत सा हैसंतुष्टि का भान क्यों नहीं है जल रहा दीयाफिर पतंगा ही परेशान सा क्यों हैभागा था वो अँधेरे से डर करक्या मिला रोशनी में आ कर क्यों आँखे सूज रही...

मेरे मालिक…….. 7

मेरे मालिक……..

मन क्यों अशांत सा हैसंतुष्टि का भान क्यों नहीं हैजल रहा दीयाफिर पतंगा ही परेशान सा क्यों है भागा था वो अँधेरे से डर करपर क्या मिला रोशनी में आ कर उसे क्यों आँखे...

मोहब्बत………….. 8

मोहब्बत…………..

तेरे दामन से यू लिपटे है हम कि ख्याबो के मंज़र भी छोटे नज़र आने लगे हैं || दिल की दुनिया को यू सज़ा बैठे है हम तेरे संग कि भरी महफ़िल में भी...

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नजदीकियां कैसे है ये दिलो के फांसले , जो नजदीकियां को बढाते हैं ;जिंदगी के इस मोड़ पर यह प्यार का नाता हमारा ,रहा कि वीरानियो को जैसे मिल गया हो सहारा तुम्हाराजिनता दूर...

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मासूम सी अदा हर शाम चले जाते हो कल का वादा करके लेकिन तुम बिन कैसे रात गुजार पाएंगेजाने क्या कहते है वो इन दो निगाहों सेऐसा लगे जैसे मोहब्बत का पैगामसुना कर चले...

मै जी लूंगी…मै जी लूंगी ……. 2

मै जी लूंगी…मै जी लूंगी …….

मै जी लूंगी…मै जी लूंगी ..…..अजीब है इस दिल की हसरते भीपास हो कर भी दूरियाँ हैं कितनीछुने का मन करता हैपर उसके खो जाने का भी डरसताता हैंबैठे है हम पास उनके इतनामन...

मेरी तन्हाई 34

मेरी तन्हाई

(आज मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट आप सबके साथ साँझा कर रही हूँ ….इसे मैंने २४ फरवरी २०१० में लिखा था ….शब्दों के बदलाव के बिना और बिना किसी एड्टिंग के आप सबके सामने...

अजीब सी उलझन में है ये मन 3

अजीब सी उलझन में है ये मन

अजीब सी उलझन में है ये मन अजीब सा ये एहसास हैउम्र के इस मौड़ परक्या किसी के आगमन का ये आभास हैक्यों अब ये दिल जोर जोर से धड़कता हैक्यों हर पल उसकी...

खामोशिया 5

खामोशिया

तेरी खामोशिया बहुत कुछ ब्यान करती हैबंदिशे तेरी ..मुझे तक पहुँचती हैदेके आवाज़ तुझे ..रोकने का मन करता हैपर क्या करूँ…तेरी भी कुछ मजबूरियामुझे हर बार रोकती है … बाँध दिए थे सब अरमां…दूर...