Author: Anju Choudhary

मै जी लूंगी…मै जी लूंगी ……. 2

मै जी लूंगी…मै जी लूंगी …….

मै जी लूंगी…मै जी लूंगी ..…..अजीब है इस दिल की हसरते भीपास हो कर भी दूरियाँ हैं कितनीछुने का मन करता हैपर उसके खो जाने का भी डरसताता हैंबैठे है हम पास उनके इतनामन...

मेरी तन्हाई 34

मेरी तन्हाई

(आज मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट आप सबके साथ साँझा कर रही हूँ ….इसे मैंने २४ फरवरी २०१० में लिखा था ….शब्दों के बदलाव के बिना और बिना किसी एड्टिंग के आप सबके सामने...

अजीब सी उलझन में है ये मन 3

अजीब सी उलझन में है ये मन

अजीब सी उलझन में है ये मन अजीब सा ये एहसास हैउम्र के इस मौड़ परक्या किसी के आगमन का ये आभास हैक्यों अब ये दिल जोर जोर से धड़कता हैक्यों हर पल उसकी...

खामोशिया 5

खामोशिया

तेरी खामोशिया बहुत कुछ ब्यान करती हैबंदिशे तेरी ..मुझे तक पहुँचती हैदेके आवाज़ तुझे ..रोकने का मन करता हैपर क्या करूँ…तेरी भी कुछ मजबूरियामुझे हर बार रोकती है … बाँध दिए थे सब अरमां…दूर...

वजह हो तुम ……. 3

वजह हो तुम …….

वजह हो तुम …….मन बेचैन है मेरा … याद् बन गये हो,क्यूंकि साथ नहीं हो तुम ………. हृदय में उतर जाते हो ,मेरी स्पंदन हो तुम …..मेरे होने की वजह , मीठा बंधन हो...

प्यार हमारा 2

प्यार हमारा

प्यार हमारा जिसका कोई रूप नहीं है जिसकी कोई भाषा ,कोई बोली नहीं है जो समझता है दिल कि ही बातो को एहसास है तो सिर्फ साथ बंध जाने का तमन्ना है तो अब...

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अच्छा होता हम बच्चे ही रहते ..वो कागज़ कि कश्ती …वो बारिश का पानी …कितन अच्छा तो वो बच्चपन काखेलना …मस्ती भरे दिन थे ..मौजो की थी रातेना कुछ सोचना….न कोई चिंता …मस्त मौला...

अजन्मी बच्ची की पुकार ……… 7

अजन्मी बच्ची की पुकार ………

अजन्मी बच्ची की पुकार ………माये ..क्यों तू ही मेरी दुश्मन बनीक्यों तू खुद को ही मारने चली …किया तुने एक घर को रोशनएक बंश बेल को बढने दिया …फिर क्यों ????????तूने मानी सब की...

जीवन है ये एक कटी पतंग………….. 2

जीवन है ये एक कटी पतंग…………..

जीवन है येएक कटी पतंगयह मै मानती हूदिन को तो ढलना हैशाम होने परसब जानते हैफिर भी …सूरज सुबह होते ही आता हैडरता नहीं डूबने के डर से ,वो ऊबता नहीं ,अपनी ही दिनचर्या...

ये चुनावी माहौल …… 0

ये चुनावी माहौल ……

चुनावी दौरलो जी ,फिर आया मौसम ,चुनाव काफिर से मुद्दों कि मुहीम छिडी…फिर से शुरू हुई वोटो को मांगने की..भीखहर प्रत्त्याशी ने अपने पत्ते है खोलेफिर से झूठे वादों का दौर आया …कही तो...