Author: Anju Choudhary

प्यार की बलि

प्यार की बलि

प्यार की बलि फिर रिश्तो की दुहाईये जात पात का अंतरये गरीब की रेखाजो बांधी ..हैअमीरों ने ..दिल से दिल का हैमिलन …फिर क्यों ये जिन्दगी हैइस तलवार की धार पेयाद आने पर बन...

तेरे ही इंतज़ार में …..

तेरे ही इंतज़ार में …..

तेरे ही इंतज़ार में मंजिल दूर है क्या जोवो आई नहीं अभी तकदिल हमारा इंतज़ार और सब्रकरते करते पत्थर का हो गया इस कदर सीना मेराइश्क से संलग्न हुआना रहीं अब इस दिल मेंकोई...

वो…राहें आज भी…..

वो…राहें आज भी…..

वो…राहें आज भी हैआज क्यूँ सारा जहान सो गयादूँ जिसे आवाज़ वो भीकहीं खो गयावक़्त कि बंदिशों मेंबेबुनियादी इल्जामो मेंदिल का हर रिश्ताधराशाही हो गयाकागज़ पे लिख देने सेरिश्ते भी टूटते है .. …....

हुस्न-ए यार प्रेम के सागर मेंहुस्न-ए यार कादीदार करके आया हूँक्या हाले दिल कहूँइन लबे-इज़हार के लिए देखो तो ज़रा उसकीनिगाहों की शोखी तोमन करता है किरख लूँ उनकोसिर्फ अपने ही दीदार के लिए...

खामोशी रात की गहन खामोशी में नींद आँखों से कोसो दूर अचानक यादो का एक रेला इन आँखों में चलचित्र सा घुमा …… वो आतंकी मौहोलवो पिता कि गोलियों से उधड़ा शरीर ..मौत के...

कहते हैं राधा ब्याहता थीं … फिर कृष्ण प्रेम , कृष्ण से पूर्व उनका नाम कसौटी पर खरा है ? मीरा ने भी माँ के द्वारा कृष्ण को पति माना पर विवाह किसी और...

एक रिश्ता दरका सा है अभी अभी कुछ देर पहलेएक रिश्ता दरका सा हैरिश्ता दिल से थाकि था बस बातो कापर एक विश्वास टूटा सा है || ये दिल लगाने वालेअपनी ही शर्तो पे...

पारिवारिक पृष्ठभूमि यानि फैमिली बैक ग्राउंड शादी के लिए या किसी को जानने के लिए कहाँ तक औचित्य रखता है ? आज के वक़्त में बहस का मुद्दा ….जिसका अर्थ है भी और नहीं...

कुछ पलो के ख्याब….

कुछ पलो के ख्याब….

कुछ पलो के ख्याब थे ,जिंदगी बन के लौट गए .. अजीब बात थी|रात की खामोशी भी शोर मचा के लौट गई.. अजीब रुत थी || चिंगारी जो रखी जुबां पे ,वो अंगार बन...