चन्द्र्कान्त देवताले जी से एक मुलाक़ात ….14 दिसंबर 2013

उज्जैन यात्रा के दौरान हमें (मैं, विजय सपपत्ति और नीतीश मिश्र ) चन्द्रकान्त देवताले जी से मुलाक़ात करने का सौभाग्य

Read more

बचपन हमारा

बचपन हमारा खुले खेत ..कच्ची पगडण्डीखेतो में पानीलगती फसलउस राहा…भागताबचपन हमारा पेड़ पर झूलारुक कर उस में ..झूलता बचपन हमाराअमुया

Read more

मै……. मै हसंती बहुत हूँ नाथोड़ी सी पागल ,थोड़ी सी दीवानीथोड़ी सी शोखीसे भरीफिर उसी पलकुछ उदास सीथोड़ी थोड़ीनादान सीओर

Read more

मेरा व्योम अर्थ नहीं होता है कोईअर्थ से टूटी भाषा कातार तार कर संकू मौन कोकेवल इतना शोर तोसुबह का

Read more