Author: Anju Choudhary

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एक रिश्ता दरका सा है अभी अभी कुछ देर पहलेएक रिश्ता दरका सा हैरिश्ता दिल से थाकि था बस बातो कापर एक विश्वास टूटा सा है || ये दिल लगाने वालेअपनी ही शर्तो पे...

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पारिवारिक पृष्ठभूमि यानि फैमिली बैक ग्राउंड शादी के लिए या किसी को जानने के लिए कहाँ तक औचित्य रखता है ? आज के वक़्त में बहस का मुद्दा ….जिसका अर्थ है भी और नहीं...

कुछ पलो के ख्याब…. 6

कुछ पलो के ख्याब….

कुछ पलो के ख्याब थे ,जिंदगी बन के लौट गए .. अजीब बात थी|रात की खामोशी भी शोर मचा के लौट गई.. अजीब रुत थी || चिंगारी जो रखी जुबां पे ,वो अंगार बन...

बदलते रिश्ते 11

बदलते रिश्ते

मै जब भी उस से मिलती हूँक्यों उस जैसी हो जाती हूँउसके ख्यालो को सोचती हूँउसकी ही आहटो पे चलती हूँउसकी दी हुई बोली ही बोलती हूँफिर भी क्यों वो ….मेरी तरह नहीं सोचतामेरी...

माचिस की तीली 4

माचिस की तीली

क्या कभी माचिस की तीली को जलते देखा है आपने ? रोशनी से भरपूर वोपर पल भर में ढेर वोघर के चिरागों कोरोशन करती वोचुल्हा जलाभूखे को रोटी काआसरा देती वोभटके पथिक कीरोशनी की...

कुछ रिश्ते अनाम होते है……………वही ”आम ” होते है 5

कुछ रिश्ते अनाम होते है……………वही ”आम ” होते है

हां …कुछ रिश्ते अनाम होते हैजो ना दो नाम तो वहीवही बदनाम होते हैजो लबो से बोल दोवही ”आम ” होते है ”आँख” और ”आंसू” भी एक रिश्ता है यूँ तो देखो तो पानी...

वीरानियाँ 12

वीरानियाँ

क्यों उदास है मेरी ये जिन्दगी खाली खाली सी क्यों लगती है मुझेगर जिन्दगी रूठ जाये तो ख़ुशी दूर हो गई मन से बहुत वीरानियो से गुज़री है ये जिन्दगीबहारो का अब कोई इंतज़ार...

जिंदगी भर तुम माने नहीं और हम तुम्हे मनाते ही रहे 6

जिंदगी भर तुम माने नहीं और हम तुम्हे मनाते ही रहे

किताबें बंद हैं यादों की जब सारी मेरे मन मेंये किस्से जेह्‍न से रह-रह कौन पढ़ता है वो बचपन में कभी जो तितलियाँ पकड़ी थीं बागों मेंबरस बीते, न अब तक रंग हाथों से...

सपने ………… 5

सपने …………

सपने ………… सपने जो सोने नहीं देतेजो किसी को अपना होने नहीं देतेखिड़की पे आया चाँद भी परायासा लगता है मुझे याद है अच्छी तरह से..हाथो में हाथ था उसकाचार कदम हम भी चले...

क्या गुनाह है मेरा 1

क्या गुनाह है मेरा

क्या गुनाह है मेरा क्या गुनाह है मेराखफा क्यों हो दिल तोड़ने वालेसितमगर बेवफा कहलायेगागम में रहकर भीजीने कि कोई किरणदिखाई नहीं देती हैक्या गुनाह है मेराखफा क्यों हो जो हुए टूटे खिलौने कोफिर...