हाय री शराब देवी !

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आज सुबह नाश्ते की मेज पर जब परिवार में बातचीत का दौर शुरू हुआ तो,एक बात सुनने को मिली कि वो बात कुछ अजीब ना होते हुए भी बहुत अजीब सी थी .पति देव ने बताया की शोरूम के दो लड़के अपनी कमेटी छुडवाने के बाद खूब शराब पी कर नशे में धुत ऐसे ही किसी ट्रेन में सवार हुए और जब उनको होश आया तो अपने आप को मुंबई में पाते हैं |
पर इस बात को सुनते ही मैं सोचने पर मजबूर हो गई कि क्या शराब का नशा इतना था कि वो दोनो ये नहीं जान पाए की वो दोनो कहाँ और किस ओर जा रहे हैं और क्या ये नशा उनका २४ घंटे तक रहा होगा कि उन्हें ये होश ही नहीं की वो लोग हैं कहां ? पूरा एक दिन वो लोग अपने घर,शहर से दूर थे,इस दौरान उनके परिवालों पर क्या गुज़री होगी ? जब ये सोचने लगती हूँ तो ऐसा लगता है कि या तो वो दोनों झूठ बोल रहे हैं या फिर ऐसा कुछ हुआ हैं जिस से वो भाग रहे हैं,पर बात जो भी हो परिवार में अपने बच्चों के लिया माँ ही सबसे पहले और सबसे अधिक परेशां होती है,पक्का के बात उन दोनों ने अपने नशे के चलते बिलकुल नहीं सोची होगी |

माना आज का वक़्त मोबाईल का है, मिनट-मिनट की ख़बर मोबाइल से ली और दी जा सकती है पर अगर शराब का नशा ही इतना गहरा हो,आप अपने होश में ही ना हो तो वो बेचारा मोबाइल भी क्या करेगा| आज के बच्चे,खास कर लड़के /लडकियाँ, जो अपने घरों से दूर ,दूसरे शहर में बसे हुए हैं वो इतनी निर्मोहि है कि वो अपने परिवार के बारे में,इस शराब के नशे या किसी भी तरह के नशे के आगे कुछ भी सोचने समझने के काबिल ही नहीं |

शराब के स्वाद में ऐसा क्या है ..जो आज की युवा पीढ़ी इस ओर बड़ी तेज़ी से आकर्षित हो रही है …शहरों/कस्बों या गावों में,हर तरफ ही बुरा हाल है …अब तो हर टी.वी सीरियल में शराब को खुलेआम पीते हुए दिखाया जाता है ….वो भले ही कोई लड़का हो ,आदमी या जवाँ होता कोई बच्चा …शराब के स्वाद के आगे लड़के/लड़की में भेद ही खत्म हो गया है..सड़क हादसों में मरने वालों में सबसे ज्यादा आज के युवा हैं..बेशर्मी और बर्बादी की हद तक अपने समाज में इस शराब ने अपनी पकड़ बना ली है |मूविंग सोसाइटी में ना पीने वाले को बेचारा और पिछड़ा हुआ समझा जाता है |

हाय री शराब देवी !
कमाल है तेरा आकर्षण
कमाल है तेरी शक्ति

पीने वालों के लिए
जग में नहीं कोई तुझ से बढ़ कर भक्ति
ये भक्त तेरे ,तेरे ही गुलाम हैं
नशे में धुत ,
नशे के घोड़े पे सवार हैं
रिश्तेनाते ,जीवन का कोई मूल्य नहीं

भले ही
तू साकार मूर्ति यमराज की
फिर भी होती है तेरी भक्ति
तू तो है बड़ी कमाल की
जिगर को लगाती आग है
फिर भी इंसा के लबों के पास है

हर रोगों की उत्पादक है ,
समस्त अच्छाइयों की नाशक है
फिर भी तू सबके बीच महान है
हे-शराब देवी ..
धन्य है तेरा नशा -धन्य है तेरा आकर्षण !!

अंजु चौधरी (अनु)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

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