Monthly Archive: February 2011

बदलते रिश्ते

बदलते रिश्ते

मै जब भी उस से मिलती हूँक्यों उस जैसी हो जाती हूँउसके ख्यालो को सोचती हूँउसकी ही आहटो पे चलती हूँउसकी दी हुई बोली ही बोलती हूँफिर भी क्यों वो ….मेरी तरह नहीं सोचतामेरी...

माचिस की तीली

माचिस की तीली

क्या कभी माचिस की तीली को जलते देखा है आपने ? रोशनी से भरपूर वोपर पल भर में ढेर वोघर के चिरागों कोरोशन करती वोचुल्हा जलाभूखे को रोटी काआसरा देती वोभटके पथिक कीरोशनी की...