Monthly Archive: September 2010

वीरानियाँ

वीरानियाँ

क्यों उदास है मेरी ये जिन्दगी खाली खाली सी क्यों लगती है मुझेगर जिन्दगी रूठ जाये तो ख़ुशी दूर हो गई मन से बहुत वीरानियो से गुज़री है ये जिन्दगीबहारो का अब कोई इंतज़ार...

जिंदगी भर तुम माने नहीं और हम तुम्हे मनाते ही रहे

जिंदगी भर तुम माने नहीं और हम तुम्हे मनाते ही रहे

किताबें बंद हैं यादों की जब सारी मेरे मन मेंये किस्से जेह्‍न से रह-रह कौन पढ़ता है वो बचपन में कभी जो तितलियाँ पकड़ी थीं बागों मेंबरस बीते, न अब तक रंग हाथों से...

सपने …………

सपने …………

सपने ………… सपने जो सोने नहीं देतेजो किसी को अपना होने नहीं देतेखिड़की पे आया चाँद भी परायासा लगता है मुझे याद है अच्छी तरह से..हाथो में हाथ था उसकाचार कदम हम भी चले...

क्या गुनाह है मेरा

क्या गुनाह है मेरा

क्या गुनाह है मेरा क्या गुनाह है मेराखफा क्यों हो दिल तोड़ने वालेसितमगर बेवफा कहलायेगागम में रहकर भीजीने कि कोई किरणदिखाई नहीं देती हैक्या गुनाह है मेराखफा क्यों हो जो हुए टूटे खिलौने कोफिर...

ख्वाब मेरा

ख्वाब मेरा

उसकी बे पनाह मोहब्बत भरी बातो को समझा हर इशारे में उसकी मोहब्बत की इबादत का रंग नज़र आता है आ कर वो मेरे कानो में धीमे से एक गीत गुनगुनाता हैमैंने तो आँखों...