Monthly Archive: February 2010

मेरी तन्हाई

मेरी तन्हाई

(आज मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट आप सबके साथ साँझा कर रही हूँ ….इसे मैंने २४ फरवरी २०१० में लिखा था ….शब्दों के बदलाव के बिना और बिना किसी एड्टिंग के आप सबके सामने...

अजीब सी उलझन में है ये मन

अजीब सी उलझन में है ये मन

अजीब सी उलझन में है ये मन अजीब सा ये एहसास हैउम्र के इस मौड़ परक्या किसी के आगमन का ये आभास हैक्यों अब ये दिल जोर जोर से धड़कता हैक्यों हर पल उसकी...

खामोशिया

खामोशिया

तेरी खामोशिया बहुत कुछ ब्यान करती हैबंदिशे तेरी ..मुझे तक पहुँचती हैदेके आवाज़ तुझे ..रोकने का मन करता हैपर क्या करूँ…तेरी भी कुछ मजबूरियामुझे हर बार रोकती है … बाँध दिए थे सब अरमां…दूर...

वजह हो तुम …….

वजह हो तुम …….

वजह हो तुम …….मन बेचैन है मेरा … याद् बन गये हो,क्यूंकि साथ नहीं हो तुम ………. हृदय में उतर जाते हो ,मेरी स्पंदन हो तुम …..मेरे होने की वजह , मीठा बंधन हो...

प्यार हमारा

प्यार हमारा

प्यार हमारा जिसका कोई रूप नहीं है जिसकी कोई भाषा ,कोई बोली नहीं है जो समझता है दिल कि ही बातो को एहसास है तो सिर्फ साथ बंध जाने का तमन्ना है तो अब...