Monthly Archive: December 2008

उन्मुक्त आकाश मै उड़ने चली थी सपनो के पंख लगा …………………………………………

उन्मुक्त आकाश मै उड़ने चली थी सपनो के पंख लगा …………………………………………

उन्मुक्त आकाश मै उड़ने चली थीसपनो के पंख लगागेरो की भीड मे..किसी अपने को तलाशने चली थीआती हुई तेज हवायो सेकिसी कटी पतंग सी …मै कटती चली गयी ..आती हुई तेज हवायो ने कतरेमेरे...

आयो थामे हाथ……..

आयो थामे हाथ……..

आयो थामे हाथ ,लिए एक दूसरे का साथकहे दिल कि बात ,और समझे जज्बात..दिल मे जो राज़ ,खोलो उसे मेरे साथरखो दिल पे हाथ ,चले चलो मेरे साथ ..अच्छा लगता है जब दिलदार मिलता...

इस बन्दे है कुछ तो बात है ………….

इस बन्दे है कुछ तो बात है ………….

जिंदगी मे..कुछ खासपलो जी लो ….कुछ अच्छी यादो कोअपने भीतर ..सहज लोआते है हर किसी कीजिंदगी मे सुख और दुःखजो चलते है हरपल पल साथ …किसी मोड़ पे ..मिले जो ज़िन्दगीतो उसे दो …अपना...

आयो ले चले तुम्हे अपनी दुनिया मे………………

आयो ले चले तुम्हे अपनी दुनिया मे………………

आयो ले चले तुम्हे अपनी दुनिया मेजंहा प्यार है …दुलार है अपनों काजंहा अपने है ……और अपनेपन का वास हैऔरजिस प हुम्हे अटूटविश्वास है …आयो ले चले .तुम्हे अपनी दुनिया मे ……जंहा साथ है...

हाथो की महंदी …………..

हाथो की महंदी …………..

हाथो की महंदी अभीछुटी भी नहीं थीआँखों मे सपनेजो सजे से थेयू ही बीचरस्ते मे टूट गएदिल मे पले अरमानभी जल गएहम तो साथ मिल केचले भी ना थेहाथो को थामा था जिसनेसदा के...

रात की तन्हायियो मे…………..

रात की तन्हायियो मे…………..

रात की तन्हायियो मे आके ..कुछ कह के चले जाना ..पर आना जरुर …..कानो मे अपने प्यार का गीत सुना के ….चले जाना …पर आना जरुर ….दिल की धड़कन को सुन करचले आना पास...

नारी जो……….

नारी जो……….

नारी जो है ….हर नर के जीवन मेहर पथ पर साथ चलने वाली……….जब मैंने लिया जन्म ..थामा जिसका हाथ ..चलने कोजिसके स्पर्श ने दी मुझे ..दी ममता मुझेवोह थी मेरी माँ ……..जब मै हुआ...

जब भी खुद को आईने मे देखा…………..

जब भी खुद को आईने मे देखा…………..

जब भी खुद को आईने मे देखाउसे भी मुझ पे हँसते पाया …वक़्त के हाथो खुद को लुटा पाया ..मै तो अंधेरो मे खो जाती ….इस दुनिया की  भीड़ मे ..अगर ..वो मेरा हाथ...

जोकर……………

जोकर……………

तू बन कर तू बन कर जोकरदे ख़ुशी सबको ,दे मुस्कान हर चेहरे परतू बन कर गुलाब ,रह काँटों के बीच,अपनी सुन्दरता को बढाकर न किसी कोदुखी तू ,बोल ना कड़वे बोल तूमन ना...

मन…………

मन…………

एहे मेरे मन तूमुझे ये बताक्यों तू अकेला सा है ..क्यों तेरा ये चेहरा ..बुझा सा हैजीवन के पथ पर तूक्यों यु पड़ा अकेला सा है ..अपने राही को लेथाम उसका हाथ ..मुश्किलों का...