हाथो की महंदी …………..


हाथो की महंदी अभी
छुटी भी नहीं थी
आँखों मे सपने
जो सजे से थे
यू ही बीच
रस्ते मे टूट गए
दिल मे पले अरमान
भी जल गए
हम तो साथ मिल के
चले भी ना थे
हाथो को थामा था जिसने
सदा के लिए
वोह ही मेरा नसीब
आन्सुयो मे लिख
दुनिया से विदा ले
सदा के लिए चले गए ……………………
………..(कृति…….अनु…..)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

One thought on “हाथो की महंदी …………..

  • December 22, 2008 at 3:27 PM
    Permalink

    Hiiiiiiii Anu…bahot hi achaa likha hai aapne…ishe ek safal prayas kaha ja sakta hai jindgi ko kuch lines me sametne ki ek bejor kosis ki gayee hai…
    Hope ki aap ish se bhi achaa likhoge

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