सिर्फ तुम………

चित्र आभार …..रोज़ी सचदेवा

सिर्फ तुम………
पैगामे–बसंत आया
अपनी मर्यादा के भीतर
वो प्यार लाया …
देखो फिर उसने एक बार
आस का दीप जलाया
सुबह की हवा ,रात चांदनी
की शीतलता का एहसास करवाया…..

जब नाम लिया तुम्हारा तो
एक ग़ज़ल बन गए

जब भी कुछ कहना चाहा…
एक पैगाम बन गए
सूरज आग सा दहक रहा
उदासी से भरे भरे सुने सब
पर तुम्हारे प्यार की बदली में
भीग गई हूँ मै
सर से नख तक …….

मेरे जीवन पथ के
पथिक….. हो तुम
अब जो फिर से मिले हो तो
साथ निभाना तुम
तुमने देखा नहीं राह चलते
कभी तुम आगाज़ बने
कभी– अंजाम बन गए ..
अपनी ही तमन्नायो के
दीप जला गए तुम
झलकी है आँखे जब भी
तुम्हारी याद में
इन आँखों में
ख़ुशी के अश्क
बन गए तुम

कहने को …
हजारो हसरते अब भी है
जो रोके नहीं रूकती
बहुत अरमान ऐसे है
जो दिल ही दिल में
तूफां-खेज़ बन गए
गर नहीं अंजाम से
वाकिफ हो .. तो
मेरी दस्ताने इश्क का
सार हो तुम ….
मेरी बची जिंदगी का
आधार हो …… सिर्फ तुम
सिर्फ तुम ………….

(अनु..)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

35 thoughts on “सिर्फ तुम………

  • June 5, 2011 at 4:53 PM
    Permalink

    बहुत भावप्रद कवितायें लिख रही हैं अंजु जी, सुन्‍दर अभिव्‍यक्ति.

  • June 5, 2011 at 7:48 PM
    Permalink

    anu ji,
    achi rachna, aabhar mere blog par ane ka ….

  • June 6, 2011 at 1:13 PM
    Permalink

    बहुत खूबसूरत भावों को प्रस्तुत किया है. ये अहसास सिर्फ अपना और अपना ही हो सकता है. जिसे संजोया गया है बड़े ही एतिहात से.

  • June 6, 2011 at 5:15 PM
    Permalink

    गर नहीं अंजाम से वाकिफ हो.. तो
    मेरी दस्ताने इश्क का सार हो तुम…

    Anuji bahut bahut hi aachi kavita he.

  • June 7, 2011 at 9:21 AM
    Permalink

    “sirf tum”…kitna pyara sa bhaw chhalak raha hai..isss TUM ke liye…..

    bahut dikhte hain armann..
    par har arman me tum nikle….:)

    behtareen rachna..!!
    god bless!!

  • June 7, 2011 at 1:45 PM
    Permalink

    प्रेम और समर्पण के समन्वय की अदभुद कविता है यह अनु जी… कुछ पंक्तियाँ बेहद कोमल है…सीधे दिल में उतारती हैं… जैसे…
    “झलकी है
    जब भी आँखें तुम्हरी याद में. “.. किसी का आँखों में झलकना एक कोमल प्रेम का एहसास है.. बहुत सुद्नर…

  • June 8, 2011 at 10:25 AM
    Permalink

    भावनाओं से ओत – प्रोत बहुत ही सुन्दर रचना |

  • June 8, 2011 at 1:05 PM
    Permalink

    भावपूर्ण अच्छी रचना। अंजू जी मेरा ब्लॉग फॉलो करिए और उसे भी पढ़िए शायद पढ़ने का आनन्द ज़ुरूर मिलेगा

  • June 8, 2011 at 2:23 PM
    Permalink

    सच में बहुत सुंदर रचना है। शानदार अभिव्यक्ति

    छलकी हैं आंखे जब भी तुम्हारी याद में,इन आंखों में खुशी के अश्क बन गए तुम।
    बहुत बढिया

  • June 8, 2011 at 4:12 PM
    Permalink

    आप तो बहुत सुन्दर लिखती हैं. चित्र भी कित्ता प्यारा है…बधाइयाँ.
    ___________________

    ‘पाखी की दुनिया ‘ में आपका स्वागत है !!

  • June 10, 2011 at 9:25 AM
    Permalink

    बहुत भावुक रचना है सुन्दर अभिव्यक्ति

  • June 11, 2011 at 10:53 AM
    Permalink

    कुछ व्यक्तिगत कारणों से पिछले 15 दिनों से ब्लॉग से दूर था
    इसी कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका !

  • June 11, 2011 at 4:18 PM
    Permalink

    आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया ….मेरी लिखी कविता को पसंद करने और दिल से टिपण्णी देने के लिए शुक्रिया आप सबका

  • June 11, 2011 at 5:50 PM
    Permalink

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति..धन्यवाद

  • July 5, 2011 at 8:38 PM
    Permalink

    Naam liya to gazal ban gaye
    Kuchh kahna chaha to paigam ban gaye
    Bahut gahri baat kahi ji

Comments are closed.