सब कहते है मै मस्त मोला हू ………………….



सब कहते है मै मस्त मोला हू ,
पर आज वक़्त दे गया मुझे ……सोच …..
जो मेरी सोच को समझ गया ……..
उसने कहा ..कुछ मत सोचो …
जो ना समझ सका मुझे ,
कहने लगा …
अब भी वक़्त है …कुछ तो सोचो ,
नहीं तो वक़्त हाथ से निकल जायेगा …
कभी तो इस सोच की ..झलक ,
इस चहरे पे ..छलक..कर
सब को सब कुछ बता जाती है …….
मरी जिंदगी का आईना ..
है ये सोच …
रिश्तो को जीने ..
की आस है ..
ये सोच …….
मेरी खामोशियों की ..
जुबा भी है ….सोच ..
आज मै जो भी कहे पा रही हू ……..
वोह भी है मेरी सोच …………..
…….(कृति……..अनु……)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव: