सपने …………


सपने …………

सपने जो सोने नहीं देते
जो किसी को अपना होने नहीं देते
खिड़की पे आया चाँद भी पराया
सा लगता है

मुझे याद है अच्छी तरह से..
हाथो में हाथ था उसका
चार कदम हम भी चले थे मिल के

एक लंबा सफर,

उभरा था इक छोटा सा सपना
मुझे अब तक नहीं मालूम

कि उस दिन
तुम्हारी आँखे
हँसती थी
बोलती थी

या फिर उदास सी थी..
वो उदासी थी या था प्यार तेरा

तेरे जाने के बाद
ढूँढती रहती हूँ
जिस्म से अपने खुशबु तेरी
तुम्हारी आवाज अब भी
लिपटी हुई है चारो और मेरे
झड झड गए वो सारे सपने
आलिंगन सेटूटी नींदे,
क्या जाने अब कितने युगों युगों तक
यू हूँ फिर से सपने सजोने होंगे ??????
(((((अंजु…..(अनु)))))

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

5 thoughts on “सपने …………

  • September 14, 2010 at 3:29 PM
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    अच्छी कविता ! सपने कभी हसाते हैं तो कभी रुलाते भी हैं !

  • September 14, 2010 at 11:56 PM
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    bahut sundar !
    ……………….gaurtalab

  • September 17, 2010 at 12:10 PM
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    kya likhti hai aap……padh ke maza aa gaya anu ji
    aise hi likhti rahe

  • September 18, 2010 at 11:42 AM
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    Anu koi apne sapnon mein rahe ya fir yadon mein,dono mein hi khush rahata hai.Agar ham so hi pate to sapne aate hi kyon.sapne hi to yatharth ke pathreele rashte par fool bankar bich jate hain aur hamari komal bhawnaon ko jakhmi hone se bachate hain.

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