मेरे मालिक……..


मन क्यों अशांत सा है
संतुष्टि का भान क्यों नहीं है
जल रहा दीया
फिर पतंगा ही परेशान सा क्यों है
भागा था वो अँधेरे से डर कर
पर क्या मिला रोशनी में आ कर उसे

क्यों आँखे सूज रही है
रोते रोते आज
क्यों हो रही है
किरणे मैली सी आज

क्यों शब्दों में है अपमान की भाषा

विचारो कि शुद्दता कहाँ खो सी गई है


आज तो सब वाकया ही बदल गया
क्यों आज अपनी ही बेटियां
एक बाप के लिए बोझ हो गई
क्यों एक मकान घर मे बदल गया
क्यों सारे शहर का मिजाज़ बदल गया
सुना था घर के चिराग से घर जल गया
पर यहाँ तो बड़ो की खुदगर्जी का साया
हम बेटियों पर भी पड़ गया

मेरे मालिक……..
तुझ से है इति सी बिनती मेरी
मुझे इंसान बना रहने दो
बनी रहे मेरे दिल में ममता की मूरत
तेरे जहाँ को प्यार कर सकूं
बस इतनी रहमत करना ।

कृति अंजु..(.अनु )

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

7 thoughts on “मेरे मालिक……..

  • August 6, 2010 at 2:39 PM
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    अत्यंत सुन्दर रचना ,,एक खूबसूरत अंत के साथ ….शब्दों के इस सुहाने सफ़र में आज से हम भी आपके साथ है …शायद सफ़र कुछ आसान हो ,,,!!!! इस रचना के लिए बधाई आपको

  • August 6, 2010 at 5:35 PM
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    Rajendra jee ne sach kaha………!!bahut khubsurat rachna……..:)

    mere malik
    meri bhi vinti sun lo
    mujhe bhi ek insaaan hi bane rahne do….:)

  • August 8, 2010 at 9:51 PM
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    bahut sundar rachna ….
    very nice blog

    Pawan:www.gaurtalab.blogspot.com

  • August 9, 2010 at 10:04 PM
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    anu ji
    bilkul sahi farmaya aapne

    bilkul satik

  • August 12, 2010 at 8:02 AM
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    बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों….बेहतरीन भाव….खूबसूरत कविता…

    आज से हम भी आपके साथ है

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