माचिस की तीली



क्या कभी माचिस की तीली को जलते देखा है आपने ?
रोशनी से भरपूर वो
पर पल भर में ढेर वो
घर के चिरागों को
रोशन करती वो
चुल्हा जला
भूखे को रोटी का
आसरा देती वो
भटके पथिक की
रोशनी की किरण
चुपचाप बिन बोले
हर बार ….बार बार
जलती वो …….

कभी कूड़े के ढेर को
राख में बदलती वो
मंदिर में जलते दीये
की पवित्र अग्नि वो
हर चिंगारी की शुरुआत वो
खुद को आग की
लपटों में खो जाने का
गम सहती वो
अपनी ही नियति से लड़ती
” माचिस की तीली वो ”
क्या कभी माचिस की तीली को जलते देखा है आपने ?
(अंजु ……….(अनु ).

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

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