मन…………


एहे मेरे मन तू
मुझे ये बता
क्यों तू अकेला सा है ..
क्यों तेरा ये चेहरा ..
बुझा सा है
जीवन के पथ पर तू
क्यों यु पड़ा अकेला सा है ..
अपने राही को ले
थाम उसका हाथ ..
मुश्किलों का कर सामना ..
तू चंदन सामान बन ..
दे अपनी खुशबु सब को
पर चिता की लकडी ..मत बन
बन कर खुशबु ..छा जा
हर जीवन को महका जा ..
अपना हर्ष मुखित
चेहरा लिए …….
ले दुनिया को जीत तू …
निर्भयता से कर सामना …
हर मुश्किल का तू ..
अपनी आप बीती को छोड़ .
वर्तमान मे जीना सीख ..
अपनी स्मृतिय्यो..को.
रख साथ मे
धर्य रख ….
उठ चल आगे बढ..
उस चींटी के समान तू ….
जो ना कभी डरी किसी से
जिस के आगे हाथी ने भी मानी हार है …
एहे मेरे मन तू
मुझे ये बता
क्यों तू अकेला सा है ……………….
…(कृति…अनु……)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

3 thoughts on “मन…………

  • June 14, 2011 at 1:51 PM
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    जो ना कभी डरी किसी से
    जिस के आगे हाथी ने भी मानी हार है …
    एहे मेरे मन तू
    मुझे ये बता
    क्यों तू अकेला सा है ……………….
    अनु जी सुंदर कृति आप की ..!!
    बड़ा अच्छा लगा आप से जुड़ के …
    I am surprised …aap ktiti ..anu …hain …main ..anpama ki sukrity hoon ..!!
    Iishwar hai ..kahin na kahin …!!
    SHUBHKAMNAYEN AAPKO.

  • June 14, 2011 at 9:42 PM
    Permalink

    जो ना कभी डरी किसी से
    जिस के आगे हाथी ने भी मानी हार है …
    एहे मेरे मन तू….. सकारातमक सोच..बहुत अच्छी रचना

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