बचपन

तपती रेत पर
पानी की एक बूंद के लिए
झुलसता है
बचपन

पेट की आग को
बुझाने के लिए
आज भी
भीख मांगता है
बचपन

अहंकार और संस्कारों की
वेदी पर
बलि चड़ता है
बचपन

कच्चे का पाढ़
पक्के की सीख
इन दोनों के बीच
क्यों पिसता है
बचपन

इस मायानगरी में
आकाश से ऊंचे सपने
सपनों से ऊंची उड़ान के लिए
क्यों कुचला जाता है सिर्फ बचपन ????

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव: