प्यार हमारा


प्यार हमारा
जिसका कोई रूप नहीं है जिसकी कोई भाषा ,कोई बोली नहीं है जो समझता है दिल कि ही बातो को एहसास है तो सिर्फ साथ बंध जाने का तमन्ना है तो अब साथ निभाने की हम तो एक पत्थर है उस रस्ते के जिस से महोब्बत के महल बना करते है मुझे ऐसी अदा से नवाज़ा एह खुदा मेरे महोब्बत का जनुन जब दिल में बसता है तो इस दिल में एक अजीब सा तुफ्फान सा उठता है इतने से काफी हो जाये ये सबब ..एह खुदा कि इश्क कि तनहा साँसे भी मुझे महका देती है उनकी यादे के साये जब घेर के मंडराते है तो चिराग महोब्बत के ही उनके मेरे इर्द गिर्द मंडराते है प्यार हमारा

जिसका कोई रूप नहीं है
………. (..कृति ..अंजु…अनु…)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

2 thoughts on “प्यार हमारा

  • February 23, 2010 at 1:23 PM
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    kalam ki jadugarni to ho hi aap. mai kya kahu aapki ish line ne ” hAM TO PATHAR HAI USH RASTE KE JIS SE MOHABAT KE MAHAL BANA KARTE HAI, MUJHE TO AISI ADA SE NAWAJA HAI…” SACHI YEH LINE TO DIL KO CHHO GAYEE

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