दो हंसो का जोड़ा……


दो हंसो का जोड़ा
निर्मल,पवित्र ,पाक सा
श्वेत, श्यामल स्वछ सा ..
चला है इस पार से उस पार..
अपने पशुत्व को जीत के
देने चला सबको प्यार का उपहार …….
दो हंसो का जोड़ा ……..
देखो फिर बदली दिशा अपनी उसने
नियति से लेने टक्कर वो चला
बना के ,ज़माने को अपना दुश्मन
खुद का प्यार वो पाने चला ………
दो हंसो का जोड़ा …………..
बहते पानी को किसने है रोका ,
झूठी दुनिया के बाशिंदे ,
इस नफरत की आग में देखो ,
ली बलि ….
फिर से उन हंसो के जोड़े की
दो हंसो का जोड़ा …….
निर्मल,पवित्र ,पाक सा
श्वेत, श्यामल स्वछ सा …….
दे कर अपने प्यार का बलिदान
देखो वो ..अमर हो चला …….
दो हंसो का जोड़ा ………
(….कृति…..अनु…..)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

3 thoughts on “दो हंसो का जोड़ा……

  • June 21, 2009 at 8:57 AM
    Permalink

    akal ke dushmano gadho ki dum
    Hanso K Jodo Ko KOi Comment nAHI
    kOI bAAT nAHI mAIN hu NAA pINTU puTTER
    WASE KAHA SE LAYE IS JODE KO CUSTOM VIBHAG NE ROKYA NAHI TENU
    O HANSI MERE SATH CHAL HANSNI
    KHAWABO KI DUNIYA MEIN TU CHAL MERI HANSNI

    PAR ANU TU HAS NAHI TU HAS NAHI

  • September 28, 2009 at 9:56 PM
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    वो दो हंसो का जोड़ा था ना इसलिए अमर हो गया….
    इंसानों की दुनिया में क्या …अब…इस टाइम संभव है….शायद नहीं..
    niru

  • December 26, 2009 at 11:18 PM
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    haahannshon me pashuttav nahi raha,,,,achchi baat hai…..tere rahan shan ko jara sa nichaa karle/ab mujhse our nichaa nahi dekha jata….omprakash

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