देख उस माँ की हालत…….


आज का मौसम
और सर्द हवा के झोके
लिपटी मै गर्म कपड़ो मे
क्या जानू ,की सर्दी है क्या ..
ऊपर से बारिश का ये नज़ारा जो
कमरे से देखी मैंने
तो मेरे मन को वोह
नज़ारा भा गया
पर
तभी किसी मासूम के
रोने से मेरी नींद मै खलल
आ गया ..
देखा जो बाहर जाके
तो आँखे हुई मेरी नम
सामने की झोपडी से एक
माँ के रोने की पुकार सुनी
देखा तो जाना की
क्या है सर्दी का मौसम
मासूम ठण्ड से कांप रहा था
और मजबूर माँ के अंचल को खिंच
रहा था ….
नारी तो है इस दुनिया की रौनक
पर
उसका बदन तो कपडे के हर …..
कौणे से झांक रहा था
वोह क्या जाने माँ का आंचल है
तार तार..
देख उस माँ की हालत
आँखे हुई नम मेरी
उतार अपना दुशाला
तन ढका उस माँ का
जो ठण्ड से कांप रही ….
मुह से तो कुछ ना बोली …….
पर उसकी आँखे मुझे बहुत कुछ कहें गयी ……………
आज का मौसम ………………
और ये सर्द हवा का झोंका ………………
(…..कृति…..अनु….).

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

5 thoughts on “देख उस माँ की हालत…….

  • January 18, 2009 at 11:24 PM
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    bahut khub maa hi maa ka dard jaanti hai naari hi naari ka aap ki rachna aur aap ko mera salaam shabdo ki atut mala

  • January 18, 2009 at 11:51 PM
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    yahi he kudrat ka krrur majak , jo karti kisi kisi ke santh , ek or deti he maa ki mamta dusri or dede ti he majburi , us maa ko jo kuchh na kar pati he chah kar apne hi jaye ko, phir bhi aas lagati he usi se jisne kiya yah majak us kudrat ke rachnakar se , or bow bhej deta he tumhe dhakne uska or uske masum ke tan ko shayad yahi he bhagwan us majbur ka jo aaya uske samne dhar tumhara rup,,,

  • January 21, 2009 at 11:28 PM
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    maanveeya samvedansheeltaa aur uspar turant kaaryavahee, maanavtaa aise hee vichaarsheel logo ke dam per tikee hui hai. kaash sabhee aisaa soch paate. kar paate.

  • January 22, 2009 at 12:50 AM
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    dekha us maa ki halat
    aankhe nam huyi meri….

    aaj sanvedan shilata dhere dhere mitati ja rahi hai… aur aapki savadan shilata dekh kar
    achchha laga….

    Bahut sundar aur marmik kavita….

    Regards…

  • February 2, 2009 at 12:49 PM
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    माँ का दर्द, और उसपे सर्दी और दुनिया की मार. आपने एक सुंदर काम किया जो शॉल उस माँ के तन पर डाल दिया. बहुत कम लोग हैं संसार में जो ऐसे नेक काम करते है. बधाई.

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