तेरे ही इंतज़ार में …..

तेरे ही इंतज़ार में

मंजिल दूर है क्या जो
वो आई नहीं अभी तक
दिल हमारा इंतज़ार और सब्र
करते करते पत्थर का हो गया

इस कदर सीना मेरा
इश्क से संलग्न हुआ
ना रहीं अब इस दिल में
कोई रंजिश उसके लिए

सामने जो पड़ गई वो
तो होश उड़ गए
ये सहोबत का असर है कि
यार मेरा भी ज़वा हो गया

दिखा के चेहरा -ए -रोशन
वो पूछते है हम से कि
भरी महफ़िल में भी
हम तन्हाँ से क्यूँ है

जानते है हम कि ये दिल
बेचैन क्यूँ है …
मरना कबूल नहीं है मुझे
तेरे ही इंतज़ार में …..
(अनु)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

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