टुकडो में बंटी जिन्दगी को हम मिल कर जी ले ………….



टुकडो में बंटी जिन्दगी को जी ले ..
एक चेहरे पे ,रख दूसरा चेहरा तू ,
अगर जीना है मन मुताबिक तो ,
रख विश्वास खुद पे
और जी के देख मेरे संग कल्पना कि दुनिया को ,
अब है हर तरफ सपनो कि ज़मी ,
तू ही मेरा सगा,तू ही मेरा प्यारा,
रहता है हर दम इस दिल मे ख्याल तुम्हारा ,
सीने मे दफ़न हुए सच्च को लेकर ,
जी के देख मेरे संग ,सपनो कि दुनिया
शान से कह तू मेरा ,मै तेरी हूँ ,
हाथ थाम ,विश्वास रख मुझे पे,
मै भी चली तेरे सगं पथरीली राहो पे ,
रख चेहरे पे मुस्कान ,कर तेरे प्यार का एहसास
माना प्यार को पुण्ये मैंने ,पाप नहीं है वोह ,
जैसा प्यार मीरा ने किया मोहन से ,
हमने भी किया है जो ,स्वार्थ नहीं निस्वार्थ है वोह ,
रख प्यार को दिल में और ,
आ प्यार से भरा ,जहर वाला प्याला हम भी पी ले …..
टुकडो में बंटी जिन्दगी को हम मिल कर जी ले ………….
(…..कृति….अनु…….)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

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