जोकर……………


तू बन कर तू बन कर जोकर
दे ख़ुशी सबको ,
दे मुस्कान हर चेहरे पर
तू बन कर गुलाब ,
रह काँटों के बीच,
अपनी सुन्दरता को बढा
कर न किसी को
दुखी तू ,
बोल ना कड़वे बोल तू
मन ना किसी का तू दुखा,
रोक ,
अपने अहंकार को तू
थाम कही वोह
तेरी महानता को
खत्म ना कर दे ,
ना कर तू किसी
कि तरफ अंगुली
देख,तीन तेरी
तरफ है झुकी हुई,
ना कर तू क्रोध
इतना कि
तेरे अंदर का
ज्वालामुखी फट जाये ,
बात हो ख़ुशी कि
तो सब के साथ बांटता चल ,
मन हो दुखी तो
खुद को खुद से ..
भी छिपता चल ……
बस,
बन कर जोकर ,
इस जीवन मे तू
सब को हँसाता….चल…हँसाता ..चल
(…कृति….अनु…..)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

One thought on “जोकर……………

  • December 21, 2008 at 6:47 PM
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    anu ji shabdo ka khajana hai aap ke paas jokar ban kar ……bahut achhe dil ko chu gai aap ki rachna

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