जिंदगी भर तुम माने नहीं और हम तुम्हे मनाते ही रहे


किताबें बंद हैं यादों की जब सारी मेरे मन में
ये किस्से जेह्‍न से रह-रह कौन पढ़ता है

वो बचपन में कभी जो तितलियाँ पकड़ी थीं बागों में
बरस बीते, न अब तक रंग हाथों से उतरता है

वो खेले थे खेल हम बाग़ में सब के संग
आज हम संग ये कौन आँख मिचौली खेलता है

जिंदगी भर मै चलती रही राह दर राह
पर मंजिल से परे अब कौन है जो धकेलता है

मुस्कुराते रहे दिल लुभाते रहे बात कुछ और थी, तुम छुपाते रहे
दर्द जैसे ग़ज़ल हो कोई मै सदियों से गुनगुनाती रही

धड़क उठा जो ये दिल उनके देखने भर से
कहो तो इसमें भला कहाँ मेरी कोई गलतियां है

तुम्हारी सोच के बिना दुनिया तो हमने देखी ही नहीं
हाँ, मगर एक नई सपनो की दुनिया जरुर बनाते रहे

आज जिंदगी से रूठ जाने की हद हो गयी
जिंदगी भर तुम माने नहीं और हम तुम्हे मनाते ही रहे
((((अंजु ….(अनु)))))

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

6 thoughts on “जिंदगी भर तुम माने नहीं और हम तुम्हे मनाते ही रहे

  • September 17, 2010 at 12:03 PM
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    sach mei…….shabdo mei jadu hai
    bahut khub likha hai tumne….keep it up

  • September 17, 2010 at 4:50 PM
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    jindagi bhar tum maane nahi……….ham manate hi rah gaye…….:)

    tum mane nahi, aur hamari jindagi manane me beet gayee……:)

    pyari gajal!!

  • September 18, 2010 at 11:35 AM
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    “tumhari soch ke bina duniyan to hamne dekhi hi nahi,haan, magar aik nai sapnonki duniyan jaroor banate rahe.”
    kisi ke prati samarpan aur uske sath-sath apni umangon ko pankh dene ka prayas adbhut hai.aksar aisa hota hai jeevan mein ki ham doosron ka sath dil se dete hain,magar apni aakankshaon ko bhi sath liye badhte rahte hain.behad anubhutipurn rachna.

  • January 23, 2011 at 1:50 PM
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    “”दर्द जैसे गजल हो कोई मैं सदियों से गुनगुनाती रही””

    ये कह देना भर ही काफी हैं
    जिंदगी से रूठ जाने की
    जिद न करो
    अभी वक्त बांकी हैं

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