खिली धूप तो ………….


खिली धूप तो ..
दूर हुआ अँधियारा ..
टूटी मन की बंदिशे ..
सिमटी आज की दुनिया ..
तो मिला नया सा रास्ता ..
इस नयी दुनिया के
ये बाशिंदे …
भागते से हर वक़्त है ..
मन की शांति का आनन्द
प्राप्त करने को ..
उतावले से है सारे…
होठो पे लिये हस्सी
खोखली सी जिंदगी
जिए जा राहे है ..
हर दिन दुःख मे बीते
पर …
हर्षित मुखिता का चेहरा लिये
हस्सने का ढोंग किये जा राहे …
दुखो भरी इस खोखली दुनिया मे …
सन्तुष्टि और प्रसन्नता ..
ही वास्तविक सम्पति है ..
इस दुनिया के बाशिंदे
इसे भूले जा रहें है ………
खिली धूप तो ..
दूर हुआ अँधियारा ..
टूटी मन की बंदिशे ……
(……..कृति…….अनु…….)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

15 thoughts on “खिली धूप तो ………….

  • October 21, 2011 at 8:43 AM
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    behtarin rachana ….shubhakamnaye

  • October 21, 2011 at 9:11 AM
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    “कितने सुन्दर भाव हैं, कितनी सुन्दर बात
    संतुष्टी धन अक्षय है, और लालसा रात”

    सार्थक रचना….
    सादर बधाई….

  • October 21, 2011 at 12:22 PM
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    वाह …बहुत ही बढि़या ।

  • May 3, 2012 at 6:48 AM
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    “दुखो भरी इस खोखली दुनिया मे …
    सन्तुष्टि और प्रसन्नता ..
    ही वास्तविक सम्पति है ..
    इस दुनिया के बाशिंदे
    इसे भूले जा रहें है …”

    सार्थक सन्देश देती सुन्दर रचना.
    सादर
    मधुरेश

  • May 3, 2012 at 11:54 AM
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    एकदम सही कहा है आपने…
    मन में दुख है फिर भी झुठी हंसी का बोझ ढोना होता है..
    यही तो जिंदगी है…सच्चाई है ये…..
    बेहतरीन और उत्कृष्ठ रचना….

  • May 3, 2012 at 5:29 PM
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    यूँ ही टूटता रहे मन की बंदिशें…..अति सुन्दर रचना..

  • May 3, 2012 at 6:46 PM
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    बंदिशे टूट ही जाएँ

  • May 3, 2012 at 11:25 PM
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    खिली धूप तो ..
    दूर हुआ अँधियारा ..
    टूटी मन की बंदिशे ..

    बंदिशे तोड़कर मन का अँधियारा दूर करने का अद्भुत सन्देश.

    बधाई.

  • May 4, 2012 at 1:08 AM
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    सन्तुष्टि और प्रसन्नता ..
    ही वास्तविक सम्पति है ..
    इस दुनिया के बाशिंदे
    इसे भूले जा रहें है ..
    -आप सही कह रही हैं पर यहाँ सुनता कौन है !

  • May 4, 2012 at 4:16 AM
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    सन्तुष्टि और प्रसन्नता ..
    ही वास्तविक सम्पति है ..
    इस दुनिया के बाशिंदे
    इसे भूले जा रहें है ………

    एकदम सत्य ।

  • May 4, 2012 at 2:09 PM
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    बहुत सुंदर भावों से पिरोयी कविता…

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