खामोशिया


तेरी खामोशिया बहुत कुछ ब्यान करती है
बंदिशे तेरी ..मुझे तक पहुँचती है
देके आवाज़ तुझे ..रोकने का मन करता है
पर क्या करूँ…तेरी भी कुछ मजबूरिया
मुझे हर बार रोकती है …
बाँध दिए थे सब अरमां…
दूर किसी डाली से..

मेरे चेहरे से तेरे ग़म को जीया आज भी मैंने ,

मिलके जो हमने जलाया वो दोस्ती का दीया आज भी है…..
(…कृति….अंजु…अनु..)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

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