क्यों तूने मेरे सुने दिल पे दस्तक दी …………..


क्यों तूने मेरे सुने दिल पे दस्तक दी ….
क्यों मेरे सपनो में आके …झंझोर मुझे …
क्यों मेरे इते करीब आने लगे हो ..
क्यों मेरे ख्याबो मे में आके ..जगाने लगे हो …..
क्यों तूने मेरे सुने दिल पे दस्तक दी ….
पास आ नहीं सकती ,
दूर मे जा नहीं सकती ,
याद तुम्हे कर नहीं सकती ,
दिन के तनहा लम्हों में ,
यादो से तुम्हारी मे दूर जा नहीं सकती ,
क्यों तूने मेरे सुने दिल पे दस्तक दी ……….
क्यों मे सपने सजाने लगी हू,
ये भी जानती हू कि ,नहीं होंगे वो पूरे..
पाने कि तुम्हे सोच नहीं सकती ,
तुम्हे खोने के डर से तड़प जाती हू,
तुम साथ हो मेरे ,इस ख्याल से रात भर जागती हू ,
पर …….
आँख खुलने पे …मेरी कल्पना कि दुनिया से
दूर चले जाते हो ,
क्यों तूने मेरे सुने दिल पे दस्तक दी ………..
अपनी अपनी दुनिया में रहने वाले हम ,
अपने इस नए एहसास को क्या नाम दे ,
मन से मन का मिलन है ये,
क्या ऐसा मान ले हम
क्यों तूने मेरे सुने दिल पे दस्तक दी ………….
(….कृति…..अनु….)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

2 thoughts on “क्यों तूने मेरे सुने दिल पे दस्तक दी …………..

  • December 27, 2008 at 11:49 PM
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    ek naya ehssas ek nai payas chahato ki abhilasha…kalpana ki duniya bahut khub anu mam sach jindgi ki raah mai payar ka ehssas karati rachana hai

  • January 23, 2011 at 1:55 PM
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    क्यों ???
    ये प्रश्न तो हमेशा से ही अन्नुतरित ही रहा हैं
    क्यों ???
    ये प्रश्न शायद इसकी नियति हैं
    (अनु)तरित रह जाना

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