कुछ पलो के ख्याब….


कुछ पलो के ख्याब थे ,जिंदगी बन के लौट गए .. अजीब बात थी|
रात की खामोशी भी शोर मचा के लौट गई..
अजीब रुत थी ||

चिंगारी जो रखी जुबां पे ,वो अंगार बन गई ….अजीब एहसास था |
दिल्लगी में दिल्लगी ,इस दिल की आग बन गई …अजीब एहसास था ||

रफ्ता रफ्ता वो जिंदगी से यूँ गई ….कभी सोचा भी ना था |
खबर भी ना लगी और वो अजनबी बन गई….कभी सोचा भी ना था ||

वाकिफ नहीं थी वो मेरे इस जलते जुनून….ये कैसी तड़प थी |
परिंदे भी आकर झील से प्यासे लौट गए …ये कैसी प्यास थी ||

हम लडखडा जाते है एक हल्की सी ठोकर के बाद …..ये अब किसका ख्याब है |
कोई अब आवाज़ भी दे तो धोखा सा लगता है …ये अब किसका इंतज़ार है ??
(((अंजु….अनु )))

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

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