ऐ ! जिंदगी

ऐ जिंदगी
ज़रा धीरे से करवट ले
देख तो लेने दे मुझे
बदलते वक़्त के
बदलते चहरों को

सृजन की वेदना को
दर्द की पीड़ा को
बदलते रिश्तों को
उड़ान भरते अरमानों को

देख लेने दे मुझे
बदलते वक़्त के
बदलते चहरों को

जीवन में मिले संगीत को
दिल के क्रंदन को
आलोक बिखरते दिन को
चाँदनी से भरी रात्रि को
खुद को मिले पुनः
संगीत को

देख लेने दे मुझे
बदलते वक़्त के
बदलते चहरों को

इंसा की तमाम चेतना को
खो कर पा लेने वाले सुख को
सीधे ह्रदय से निकले
शब्दो को
आशा से भरे अस्तित्व को
खुद की ऊंची उड़ान को

हाँ! हाँ
फिर से,ऐ ! जिंदगी
देख लेने दे मुझे
बदलते वक़्त के
बदलते चहरों को ||

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव: