उन्मुक्त आकाश मै उड़ने चली थी सपनो के पंख लगा …………………………………………


उन्मुक्त आकाश मै उड़ने चली थी
सपनो के पंख लगा
गेरो की भीड मे..
किसी अपने को तलाशने चली थी
आती हुई तेज हवायो से
किसी कटी पतंग सी …मै कटती चली गयी ..
आती हुई तेज हवायो ने कतरे
मेरे भी पंख ..
हकीकत के धरातल पर ..
मै औंधी मुंह …
गिरती चली गयी ..
उन्मुक्त आकाश मै उड़ने चली थी
सपनो के पंख लगा ………………..
मै अपने खुद के रिश्ते
धुंधले करती चली गयी ..
मै अपनी बातो से
किसी के दिल मै बसने चली थी …
पर अब ……
अपनी ही नजरो से गिरती चली गयी ……
उन्मुक्त आकाश मै उड़ने चली थी
सपनो के पंख लगा ……………………
……..(कृति……अनु…….)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव: