इश्क चला है हुस्न से मिलने………

चित्र आभार ….रोज़ी सचदेवा

इश्क चला है हुस्न से मिलने………

चांदनी रात के साये में
चाँद की भीगी चांदनी में
इश्क बोला हुस्न से
ले कर हाथो में हाथ चलो
यूँ ही चलते चलते
उम्र भर साथ चलो
मेरी आस से बंधी है
आशा की डोर और
उमंगो की पतंग
रात की शीतलता में
डूब जायेगे हम तुझ संग
एहसास की नगरी में
लिए यूँ ही शर्मीली मुस्कान
तुम चलो मेरे द्वार..
संग लिए फूलों का हार चलो …………..
चांदनी रात के साये में …………

बढते चले जाएगें
उभरते चले जाएगें
ये मन गा रहा है
प्रेम गीत …वो यूँ ही
गाते चले जाएगें
क्यों हम डोलने लगे है
आशा और अभिलाषा
की बोली में
हम तो यूँ ही
गलबहियां डाले मिलेगे
अपनी ही नई नई
देहलीज़ पर
खुशियों का एक
आशियाना बनायेगे
चाँद की ज़मी पर
डूब जायेगे हम …
धड़कने खलेंगी हमारी ..
जुबा चुप हो जाएगी
दिल का राग सुनेगे हम
नयनो की भाषा की
होगी जीत
जो भरेगी हमारी
ख़ामोशी में भी संगीत
मै सितारों से तेरी
मांग भरूँगा
दूंगा हुकुम चाँद को
कि नाम बदल
ले वो अपना
ये खामोश निगाहें
इशारो से तुझे बुलाएंगी
अंजुमन महक उठेगा अपना
जब ..
इश्क चलेगा अपने हुस्न से मिलने
चांदनी रात के साये में ……..

(अनु..)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

54 thoughts on “इश्क चला है हुस्न से मिलने………

  • June 11, 2011 at 8:51 PM
    Permalink

    बहुत खूबसूरत कविता हैँ ।
    मन के एहसासोँ की अच्छी अभिव्यक्ति हुई हैँ। आभार अनु दी ।

  • June 11, 2011 at 9:12 PM
    Permalink

    दूंगा हुकुम चाँद को
    कि नाम बदल
    ले वो अपना
    ये खामोश निगाहें
    इशारो से तुझे बुलाएंगी
    अंजुमन महक उठेगा अपना
    जब ..
    इश्क चलेगा अपने हुस्न से मिलने
    चांदनी रात के साये में ……..
    sunder pyari soch
    rachana

  • June 11, 2011 at 9:21 PM
    Permalink

    यूसुफ़ का जज़्बे इश्क ,ज़ुलेखा का जज़्बे हुस्न
    कि आना पड़ा पलट के दोबारा शबाब को ।

  • June 11, 2011 at 10:27 PM
    Permalink

    किसी शायर ने कहा है,
    हर रात ने वादा किया था साथ निभाने का |
    और सुबह होने तक रंग बदल दिया ||

    वाह वाह भाभी वाह- प्रवीण आर्य

  • June 12, 2011 at 7:58 AM
    Permalink

    धड़कने खलेंगी हमारी ..
    जुबा चुप हो जाएगी
    दिल का राग सुनेगे हम
    नयनो की भाषा की
    होगी जीत
    जो भरेगी हमारी
    ख़ामोशी में भी संगीत

    और

    ये खामोश निगाहें
    इशारो से तुझे बुलाएंगी

    अनु जी बहुत ही सुन्दर रचना हे सच कहू तो इस रचना के लिये मेरे पास शब्द नहीं हे
    आप का बहुत बहुत धन्यवाद इतनी सुन्दर रचना लिखने के लिये

  • June 12, 2011 at 8:11 AM
    Permalink

    धड़कने खलेंगी हमारी ..
    जुबा चुप हो जाएगी
    दिल का राग सुनेगे हम
    नयनो की भाषा की
    होगी जीत
    जो भरेगी हमारी
    ख़ामोशी में भी संगीत

    और

    ये खामोश निगाहें
    इशारो से तुझे बुलाएंगी

    अनु जी बहुत ही सुन्दर रचना हे सच कहू तो इस रचना के लिये मेरे पास शब्द नहीं हे
    आप का बहुत बहुत धन्यवाद इतनी सुन्दर रचना लिखने के लिये

  • June 12, 2011 at 11:02 AM
    Permalink

    बहुत ख़ूबसूरत और शानदार कविता है! हर एक पंक्तियाँ लाजवाब है!

  • June 12, 2011 at 11:30 AM
    Permalink

    इश्क चलेगा अपने हुस्न से मिलने
    चांदनी रात के साये में ……..

    अनु जी,
    क्या खूबसूरत रचना लिखि है आपने!

  • June 12, 2011 at 3:39 PM
    Permalink

    आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (13-6-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

  • June 12, 2011 at 6:03 PM
    Permalink

    Prem ko jis khoobsurti ke sath apne ish kavita ke jariye abhivyakt kiya hai..wo prasansniye hai..

    aasha karta hu ki aapki dil ke taro ko chhuti hue rachnaye hame aage bhi padhne ko milegiii

  • June 12, 2011 at 8:52 PM
    Permalink

    वाह इतना खूबसूरत और इतना रोमांटिक , बहुत ही सुंदर रचना जी । शुभकामनाएं

  • June 12, 2011 at 9:03 PM
    Permalink

    बेहद खूबसूरत एहसास .सुन्दर रचना.

  • June 12, 2011 at 9:08 PM
    Permalink

    अनु ,तुम्हारी कविता बहुत ही सुन्दर है .कोमल भावनाओं से सजी यह रचना श्रृंगारिक कवियों कि रचनाओं की याद दिलाती है.भाव पक्ष बहुत ही प्रभावशाली बन पड़ा है.

  • June 12, 2011 at 10:56 PM
    Permalink

    आप सब का मेरे ब्लॉग पर आने का शुक्रिया

  • June 12, 2011 at 10:59 PM
    Permalink

    संगीता स्वरुप ( गीत ) जी …….वंदना जी …..और दिलबाग जी आप तीनो का भी बहुत बहुत शुक्रिया मेरे चयन के लिए

  • June 13, 2011 at 7:59 AM
    Permalink

    क्या बात है….. ,बड्डे जिगरा दी गल है . इन्ना सोणा अहसास .
    शुक्रिया जी ../

  • June 13, 2011 at 1:00 PM
    Permalink

    हुस्न और इश्क के बीच द्वन्द तो सदियों पुराना है… इस द्वन्द को नए सन्दर्भ में नए अंदाज़ में प्रस्तुत किया है अनु जी आपने… कविता बेहद रोमांटिक है और नदी सा प्रवाह है इसमें… एक खूबसूरत नज़्म के लिए आपको शुभकामना…

  • June 13, 2011 at 1:38 PM
    Permalink

    वह बहुत अच्छी रचना है ! मज्जा आ गया !मेरे ब्लॉग पर अपना सहयोग दे !
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  • June 13, 2011 at 1:41 PM
    Permalink

    हुस्न और इश्क .. दोनो का साथ चोली दामन का है …. बहुत खूबसूरत शब्दों में उतारा है …

  • June 13, 2011 at 3:40 PM
    Permalink

    अति सुन्दर कोमल भावनाओं की अभिव्यक्ति ।
    सुधा भार्गव

  • June 14, 2011 at 9:25 AM
    Permalink

    सुन्दर रचना और बहुत उम्दा भाव!!

  • June 14, 2011 at 5:25 PM
    Permalink

    सुन्दर रचना के लिये बहुत बहुत धन्यवाद!

  • June 14, 2011 at 10:01 PM
    Permalink

    सुँदर भाव प्रवण अभिव्यक्ति.

  • June 15, 2011 at 11:16 AM
    Permalink

    धड़कने खलेंगी हमारी ..
    जुबा चुप हो जाएगी
    दिल का राग सुनेगे हम
    नयनो की भाषा की
    होगी जीत
    जो भरेगी हमारी
    ख़ामोशी में भी संगीतबहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

    यह कविता भी अच्छी बन पड़ी है.बहुत बोलती तस्वीर है

  • June 15, 2011 at 4:27 PM
    Permalink

    मेरे ब्लॉग पर आने वाले हर दोस्त का दिल से शुर्किया ….मेरी कविता को पढने और उसकी तारीफ़ ले किये

  • June 16, 2011 at 8:35 AM
    Permalink

    इश्क चलेगा अपने हुस्न से मिलने
    चांदनी रात के साये में ……..

    बहुत खूब.

  • June 16, 2011 at 6:24 PM
    Permalink

    ek ek shabd, dil me apni jagah bna gya……bot badiya…..its one of ur bestst poem chachi !
    keep up the gud work.

  • June 18, 2011 at 12:38 PM
    Permalink

    इश्क चलेगा अपने हुस्न से मिलने
    चांदनी रात के साये में ……..बहुत सुंदर.

  • June 19, 2011 at 4:35 PM
    Permalink

    chandni raat ho apne ka saath ho ye sab kitna achchha lagta hai anu ji.

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