आयो ले चले तुम्हे अपनी दुनिया मे………………


आयो ले चले तुम्हे अपनी दुनिया मे
जंहा प्यार है …
दुलार है अपनों का
जंहा अपने है ……
और अपनेपन का वास है
और
जिस प हुम्हे अटूट
विश्वास है …
आयो ले चले .तुम्हे अपनी दुनिया मे ……
जंहा साथ है साथ निभाने वाला
जंहा सब है एक
घर को….घर बनाने वाले ….
आयो इस जंहा को अपना बनाये …
दुखो को दर किनारा कर ..
थामे खुशियों का दामन
मांगे अपनों का साथ ..
आयो हम भी …
अपनों का साथ निभाए
आयो ले चले तुम्हे अपनी दुनिया मे……..
मेरी इस दुनिया मे
धोखा नहीं ….फरेब नहीं ..
झूठ और मक्कारी नहीं …
है तो बस …,,,,
प्यार और अपनों पे विश्वास …
आयो ले चले तुम्हे अपनी दुनिया मे……….,,,,,,,,,,,,,,,,
.(…..कृति …….अनु…….)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

One thought on “आयो ले चले तुम्हे अपनी दुनिया मे………………

  • December 28, 2008 at 1:03 PM
    Permalink

    sachiiiiiiiii muchiiiiiii

    jindgi ko bhali bhati samjhte ho. warna
    koi itni saralta se itne sare bato ko byakt nahi kar sakta

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