आंखे …..


याद करके जब
रोने लगी ये
आंखे ………..
अश्क भी ..अब साथ
नहीं देते …
दिल मे उठे दर्द
को नहीं मै समझ पा रही
ख़ुशी की तलाश मे..
चली थी मै…….
पर गमो को साथ लिये…
लौटी हु मै …….
ना भूलने वाली यादे ..
अब मेरे मानस पर
छा सी गयी है ..
जो मिला था कुदरत से
उसे छोड़
मिथ्या ..के पीछे
भागी थी मै
मृग्मारिच्का के पीछे
घने मरुस्थल
मे भटक गयी हु मै …….
याद करके जब
रोने लगी ये
आंखे ………..
…..(कृति…अनु…)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

7 thoughts on “आंखे …..

  • December 22, 2008 at 11:11 PM
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    ask bhi ab santh nahi dete woh anu bahut khub
    dil ko chune bali rachna he ,,

  • December 22, 2008 at 11:14 PM
    Permalink

    ask bhi ab santh nahi deta ,,,,
    wah anu bahut khub
    dil ko chuune wali rachna he,

  • September 7, 2011 at 1:34 PM
    Permalink

    बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

  • December 6, 2012 at 7:03 PM
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    भाव-विह्वल कर देने वाले शब्दों की कडिया….सिन्दार

  • December 13, 2012 at 12:42 AM
    Permalink


    ख़ुशी की तलाश मे…
    चली थी मै… …
    पर ग़मों को साथ लिये…
    लौटी हूं मैं… … …
    ना भूलने वाली यादें…
    अब मेरे मानस पर
    छा-सी गयी हैं…
    जो मिला था कुदरत से
    उसे छोड़
    मिथ्या के पीछे
    भागी थी मै
    मृगमरीचिका के पीछे
    घने मरुस्थल
    में भटक गयी हूं मैं … … …

    रचना क्या , एक करुणागान है …
    आदरणीया अनु जी !

    सुंदर लिखा है …
    मन तक स्पर्श करने जैसा …

    शुभकामनाओं सहित…

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