अरमानो के पंख लगा ….उड़ने दो ……………


उड़ने दो ..उड़ने दो खुले आसमा में ,
अरमानो के पंख लगा ….उड़ने दो ,
जंहा सारा आसमा मेरा हो ,
जंहा ना बंदिशों का डेरा हो …
भले मिले ना इन राहो पे फूल तो ,
उनके काँटों से भी मुझे दोस्ती करने दो ,
पर फूलो कि भांति मुझे भी खिलने दो
खिलने दो …………..
करने दो ,करने दो …
मुझे भी अपने मन कि करने दो ,
खुद से खुद का परिचय करने दो ,
आज इस ज़माने मे ,मैंने भी बड़ी बात कर ली
खुद से खुद कि मुलाकात कर ली ………
तोडी परम्परा कि बेडिया…….
अपने खुद के सपने सजाने के लिए ,
अब तो परिवर्तन के दोर..कि शुरुआत कर दी ……
उड़ने दो ..उड़ने दो खुले आसमा में ,
अरमानो के पंख लगा ….उड़ने दो …………..
बंदिशों कि घेरे में ..छटपटाती नारी हु में ,
गलतियों से बचते हुए ,जिंदगी गुज़री ,
अपनों कि बेडियों से अब ,मुक्ति पाने लगी हू मै ,
इन बेडियों से ..जकड़ी तन और मन कि काया है ,
आज
खुलने दो ..खुलने दो ……….
मुझे भी अब हक़ के साथ
जीने दो….जीने दो …..
बचे जो पल ज़िन्दगी के ……..
मुझे खुद के लिए जीने दो…….
जीने दो ………..
उड़ने दो ..उड़ने दो खुले आसमा में ,
अरमानो के पंख लगा ….उड़ने दो ……………
…..अनु…….

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

2 thoughts on “अरमानो के पंख लगा ….उड़ने दो ……………

  • January 14, 2009 at 12:37 PM
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    नारी की सोच नारी की घुटन दर्द शब्दों की गहराई अनु खुब उम्दा तरीके से उतारा है आपने सच आप की लेखनी की कला बहुत बढ़िया है

  • January 16, 2009 at 4:36 PM
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    tum pari lok se aayee thi,aaankho me sapne layee thi
    tum dard se thi sahmi huee,labo se bhi tum pyasi thi
    humne tumhare tan ko chhuha,tumne mere man ko chhuha
    maine tan pe marham jo diya,tumne mujhe apnapan diya
    tumne man ko samajh liya,jab mere baho me kaid huee
    phir haule-haule hasne lagi,sansho me mere basne lagi
    kyu tum hoke mujhse unmukt ,aakash me udhna chahti ho
    ab kyu tum mere sapne todhke mujhse ajad hona chahti ho
    kya mila nahi sukun tumko yaha ab kya aur pana chati ho
    kyu mujhko akela bejan chodh aasman me udhna chahti ho
    ab ek gujarish hai is dil ki tum samjh sako samajh jao
    man ka agan hai bahut badha ishme tum udho swatrant yaha
    mat chodh mujhe to tum jane ki socho ab laut bhi aao ab…………….

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