अजन्मी बच्ची की पुकार ………


अजन्मी बच्ची की पुकार ………
माये ..क्यों तू ही मेरी दुश्मन बनी
क्यों तू खुद को ही मारने चली …
किया तुने एक घर को रोशन
एक बंश बेल को बढने दिया …
फिर क्यों ????????
तूने मानी सब की बात
क्यों नहीं सुनी अपने दिल की आवाज़
ओह माँ ……ओह माँ
क्यों तूने जन्म से पहले मेरी बलि देदी ??????
(…..कृति….अनु……)

Anju Choudhary

प्रकाशित काव्य संग्रह: …’’क्षितिजा’’ ‘’ऐ री सखी’’ ‘’ठहरा हुआ समय’’ संपादन: १. “कस्तूरी” “अरुणिमा” ‘’पगडंडियाँ’’ ‘’गुलमोहर’’ ‘’तुहिन और गूँज’’ प्रकाशित साझा काव्य संग्रह में मेरी भी कविताएँ…….अनुगूँज, शब्दों की चहलकदमी,नारी विमर्श के अर्थ,सुनो समय जो कहता है,काव्य सुगंध, आकाश अपना अपना (सभी साँझा कविता संग्रह ) मुट्ठी भर अक्षर (साँझा कहानी संग्रह )…समाचार पत्र और पत्रिकाओं से जुडाव:

7 thoughts on “अजन्मी बच्ची की पुकार ………

  • March 29, 2009 at 12:06 AM
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    भ्रूण्हत्या पर आप की अभिव्यक्ति निश्चित रूप से भाव प्रधान है.
    ऐसा नहीं होना चाहिए, फिर क्यों होता है ?
    इस पर आत्म अवलोकन की आवश्यकता है
    – विजय

  • March 30, 2009 at 1:37 PM
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    कहते है न् .. स्त्री ही स्त्री की दुश्मन .. जब तक स्त्री अपना महत्व नहीं समझेगी , नहीं जानेगी यह होता रहेंगा …
    I am very much proud that I have a Daughter….

  • March 31, 2009 at 6:56 PM
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    sundar abhivakti….preeti ji ki baat sahi he aur stri ko apne astitv ke liye khud hi jagrut hona padega….

  • April 26, 2009 at 12:46 AM
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    आपके द्वारा अजन्मी बिटिया के लिए लिखी गयी ये छोटी कविता बड़ी अर्थवान और दिल को छोने बाली है.

  • May 28, 2009 at 11:33 PM
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    I’m sorry I can’t tell you what
    I’m sure you’d rather hear,
    But there’s a burden in my heart
    I can no longer bear.

  • September 28, 2009 at 9:50 PM
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    सच यार आज कल हर जगहे यही हो रा है….बड़ा दिल दुखता है….
    क्या लिखती हो यार….सीधा दिल में लगता है…ओरत ही ओरत की दुश्मन बनी बैठी है..

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