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6 Responses

  1. Rajiv says:

    अनु,पारिवारिक पृष्ठभूमि ,चाहे वह एकल परिवार हो या संयुक्त परिवार,अपना प्रभाव दिखाता ही है.छोटे और सीमित परिवार में विकास की परिधि निश्चित रूप से छोटी होती है जबकि संयुक्त परिवार काफी बड़ी.गुणों के आदान-प्रदान का दायरा भी बड़ा होता है,इसलिए गुणों का ग्रहण क्षेत्र भी व्यापक होता.अतः मेरा तो मानना है कि पारिवारिक पृष्ठभूमि किसी को जानने का आज भी सर्वोत्तम पैमाना है.

  2. Khare A says:

    koi burai najar nhi aati, aakhir jis family se aapne sambandh banana he jindgi bha rka, uske abre kuch gya ho jaye to koi burai nhi!

  3. Sunil Kumar says:

    सार्थक पोस्ट जिन्दगी के आसपास घुमती हुई , बहुत अच्छी लगी, बधाई

  4. विचारणीय पोस्ट है आपकी.

  5. neera says:

    सवाल बढ़िया है पर सबके विचार अलग ही होंगे…संयुक्त परिवार की अपनी प्रोब्लम्स होती हैं और एकल की अपनी…पर जहाँ तक संस्कारो की बात है …परिवार छोटा हो या संयुक्त ,,कोई भी अपने बच्चो को गलत संस्कार देना नहीं चाहेगा…अब आज कल इतने मर्डर ,,,रेप ,,बोम बलास्ट हो रहे हैं…जो लोग कर रहे हैं उनके माँ बाप को तो पता भी नहीं होगा के उनका बच्चा इसमें शामिल है…
    बस भगवान से यही दुआ करें की इंसान को ख़ुद गलत और सही फैसला करने की हिम्मत दे…हिंदुस्तान के संस्कारों को पहचाने और मान दें.